नगर निगम परिषद के 4 साल पूरे: डिजिटल इंदौर से 2047 विजन तक का रिपोर्ट कार्ड पेश; सीवर मुक्त शहर बनाने पर जोर

इंदौर। नगर निगम परिषद के 4 वर्ष पूरे होने पर मंगलवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव और MIC सदस्यों ने अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। महापौर ने कहा कि परिषद ने “क्लीन इंदौर, ग्रीन इंदौर और डिजिटल इंदौर” के संकल्प के साथ काम शुरू किया था और बीते चार वर्षों में पानी, सड़क, सीवरेज, स्वच्छता, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को धरातल पर उतारा गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेहरू स्टेडियम के रिवाइवल का काम अब तक शुरू नहीं हो सका, जिसे अगले एक वर्ष में गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
देश का पहला डिजिटल एड्रेस सिस्टम, सभी सेवाएं एक पोर्टल पर
महापौर ने बताया कि इंदौर देश का पहला नगर निगम है जिसने डिजिटल एड्रेस सिस्टम लॉन्च किया है। नगर निगम की सभी सेवाओं और विभागों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का काम अंतिम चरण में है। इसके साथ ही शहर के वार्डों की डिजिटल प्लानिंग भी की जा रही है।
60 मेगावाट सोलर प्लांट से हर महीने 4 करोड़ की बचत
उन्होंने बताया कि नगर निगम ने देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड जारी किया, जिससे जुटाई गई राशि से जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया गया। इसके जरिए निगम के बिजली खर्च में हर महीने करीब 4 करोड़ रुपए की बचत हो रही है। वहीं अब तक 3200 से अधिक घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
2047 की जरूरतों के हिसाब से तैयार हो रहा जल प्रबंधन
महापौर के अनुसार, भविष्य की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 2156 करोड़ से अधिक लागत की चार मेगा जलप्रदाय परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। इसके तहत 400 एमएलडी क्षमता का आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, 1650 एमएलडी इनटेक वेल, 40 नई ओवरहेड टंकियां, 1577 किलोमीटर नई पाइपलाइन, करीब 2.48 लाख नए घरेलू नल कनेक्शन और स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि 2047 तक की जरूरतों को देखते हुए करीब 2600 करोड़ रुपए की परियोजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें ब्लू बॉन्ड के माध्यम से भी राशि जुटाई जाएगी।
स्वच्छता में फिर नंबर-1 का लक्ष्य, बढ़ेगी कचरा प्रसंस्करण क्षमता
महापौर ने कहा कि शहर में प्रतिदिन लगभग 800 टन गीला कचरा आ रहा है, जबकि वर्तमान क्षमता 500 टन है। इसे देखते हुए सीएटी रोड और पितृ पर्वत पर दो नए सीएनजी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इंदौर इस बार भी स्वच्छता में देश में पहला स्थान हासिल करेगा।
800 करोड़ से ज्यादा की सड़क परियोजनाओं को मिली रफ्तार
भविष्य के ट्रैफिक दबाव को देखते हुए 800 करोड़ रुपए से अधिक की सड़क परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। 23 मास्टर प्लान सड़कों सहित करीब 36 प्रमुख सड़क और लिंक रोड विकसित किए गए हैं। एमआर-10 से एमआर-12 लिंक रोड, एयरपोर्ट लिंक रोड, चंदन नगर लिंक रोड और एडवांस अकादमी से रिंग रोड जैसी परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वहीं सराफा और राजवाड़ा क्षेत्र में भी आपातकालीन वाहनों की आवाजाही आसान बनाने के लिए विशेष कार्य किए गए हैं।
सीवर मुक्त शहर बनाने पर जोर
महापौर ने बताया कि पिछले चार वर्षों में 122.09 करोड़ रुपए की लागत से सात प्रमुख सीवरेज परियोजनाएं पूरी हुई हैं और 30.65 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाई गई है। वर्तमान में नौ परियोजनाओं पर काम जारी है, जबकि नमामि गंगे, अमृत-2.0, सिंहस्थ-2028 और अर्बन चैलेंज फंड के तहत लगभग 1900 करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके जरिए 687 एमएलडी नई सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता और 450 किलोमीटर से अधिक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। अमृत-2.0 के तहत निगम सीमा में शामिल 29 गांवों में भी पेयजल और ड्रेनेज नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।
अगले एक साल का फोकस
महापौर ने कहा कि परिषद का लक्ष्य केवल पांच साल का कार्यकाल पूरा करना नहीं, बल्कि आने वाले 25 वर्षों के इंदौर की मजबूत नींव रखना है। अगले एक वर्ष में मास्टर प्लान की सड़कों, जल प्रदाय, सीवरेज, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण, उपचारित जल के पुन: उपयोग और नेहरू स्टेडियम रिवाइवल जैसी लंबित परियोजनाओं को गति देने पर विशेष फोकस रहेगा।