इंदौर में किसानों की ट्रैक्टर रैली पर पुलिस की कार्रवाई: वॉटर कैनन का हुआ इस्तेमाल, कई प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन कर रहे किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। किसानों द्वारा शहर में निकाली गई एक विशाल ‘ट्रैक्टर रैली’ के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने किसानों पर वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया और कई किसान नेताओं सहित प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

मिली जानकारी के मुताबिक, इंदौर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारी किसान फसलों के उचित दाम (MSP), लंबित मुआवजे और कृषि नीतियों से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासनिक कार्यालय (कलेक्ट्रेट) का घेराव करने या ज्ञापन सौंपने की ओर बढ़ रहे थे। किसानों का यह आंदोलन ‘ट्रैक्टर रैली’ के रूप में आयोजित किया गया था, जिसके चलते शहर के मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने रैली को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया था। शहर की सीमाओं और कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस ने मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब किसानों की रैली तय सीमा पर पहुंची, तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी किसान बैरिकेड्स हटाने और आगे बढ़ने की जिद पर अड़ गए, जिससे पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

वॉटर कैनन का इस्तेमाल और गिरफ्तारियां

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। ठंडे पानी की तेज बौछारों के कारण प्रदर्शनकारी पीछे हटने पर मजबूर हो गए। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने धाराएं तोड़ने और अशांति फैलाने के आरोप में मौके से कई प्रमुख किसान नेताओं और दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया।

क्यों मजबूर हुए किसान आंदोलन को

  • आपत्ति के बाद भी नामांतरण: अंशधारक किसानों ने 13 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी सांवेर को जमीन नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कराई और 19 फरवरी 2026 को कलेक्टर इंदौर को भी लिखित ज्ञापन दिया। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की एक न सुनी और 17 मार्च 2026 को शक्कर मिल की जमीन का नामांतरण कर दिया गया।
  • RTI में भी जानकारी नहीं: मोती सिंह पटेल ने बताया कि हमने परिसमापक अधिकारी, इंदौर एवं संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, इंदौर के यहां सूचना के अधिकार के तहत शक्कर मिल का बायलॉज, नियम, उपविधि एवं अंशधारक सदस्यों की सूची मांगी थी। चार माह बीत जाने के बाद भी आज तक कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। यह पारदर्शिता पर सीधा हमला है।
  • निर्माण कार्य पहले से शुरू: नामांतरण से पहले ही मिल की जमीन पर रेडीमेड गारमेंट कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जो पूरी तरह अवैध है।

किसानों की मुख्य मांगें

समिति ने स्पष्ट किया कि हमारे पूर्वजों ने 50-60 वर्ष पूर्व ₹500 एवं ₹1000 के शेयर लेकर इस मिल की स्थापना की थी। उस समय जमीन का भाव ₹500 से ₹1000 प्रति बीघा था। इसलिए हमारी दो स्पष्ट मांगें हैं।

  • उचित मुआवजा: अंशधारक किसान परिवारों को उनके अंश के अनुपात में आज के वर्तमान बाजार भाव से पूरा मुआवजा दिया जाए।
  • रोजगार में प्राथमिकता: प्रस्तावित रेडीमेड उद्योग में अंशधारक किसान परिवारों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता से स्थायी रोजगार दिया जाए।
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इंदौर में किसानों की ट्रैक्टर रैली पर पुलिस की कार्रवाई: वॉटर कैनन का हुआ इस्तेमाल, कई प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन कर रहे किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। किसानों द्वारा शहर में निकाली गई एक विशाल ‘ट्रैक्टर रैली’ के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने किसानों पर वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया और कई किसान नेताओं सहित प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

मिली जानकारी के मुताबिक, इंदौर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारी किसान फसलों के उचित दाम (MSP), लंबित मुआवजे और कृषि नीतियों से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासनिक कार्यालय (कलेक्ट्रेट) का घेराव करने या ज्ञापन सौंपने की ओर बढ़ रहे थे। किसानों का यह आंदोलन ‘ट्रैक्टर रैली’ के रूप में आयोजित किया गया था, जिसके चलते शहर के मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने रैली को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया था। शहर की सीमाओं और कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस ने मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब किसानों की रैली तय सीमा पर पहुंची, तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी किसान बैरिकेड्स हटाने और आगे बढ़ने की जिद पर अड़ गए, जिससे पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

वॉटर कैनन का इस्तेमाल और गिरफ्तारियां

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। ठंडे पानी की तेज बौछारों के कारण प्रदर्शनकारी पीछे हटने पर मजबूर हो गए। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने धाराएं तोड़ने और अशांति फैलाने के आरोप में मौके से कई प्रमुख किसान नेताओं और दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया।

क्यों मजबूर हुए किसान आंदोलन को

  • आपत्ति के बाद भी नामांतरण: अंशधारक किसानों ने 13 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी सांवेर को जमीन नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कराई और 19 फरवरी 2026 को कलेक्टर इंदौर को भी लिखित ज्ञापन दिया। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की एक न सुनी और 17 मार्च 2026 को शक्कर मिल की जमीन का नामांतरण कर दिया गया।
  • RTI में भी जानकारी नहीं: मोती सिंह पटेल ने बताया कि हमने परिसमापक अधिकारी, इंदौर एवं संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, इंदौर के यहां सूचना के अधिकार के तहत शक्कर मिल का बायलॉज, नियम, उपविधि एवं अंशधारक सदस्यों की सूची मांगी थी। चार माह बीत जाने के बाद भी आज तक कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। यह पारदर्शिता पर सीधा हमला है।
  • निर्माण कार्य पहले से शुरू: नामांतरण से पहले ही मिल की जमीन पर रेडीमेड गारमेंट कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जो पूरी तरह अवैध है।

किसानों की मुख्य मांगें

समिति ने स्पष्ट किया कि हमारे पूर्वजों ने 50-60 वर्ष पूर्व ₹500 एवं ₹1000 के शेयर लेकर इस मिल की स्थापना की थी। उस समय जमीन का भाव ₹500 से ₹1000 प्रति बीघा था। इसलिए हमारी दो स्पष्ट मांगें हैं।

  • उचित मुआवजा: अंशधारक किसान परिवारों को उनके अंश के अनुपात में आज के वर्तमान बाजार भाव से पूरा मुआवजा दिया जाए।
  • रोजगार में प्राथमिकता: प्रस्तावित रेडीमेड उद्योग में अंशधारक किसान परिवारों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता से स्थायी रोजगार दिया जाए।
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