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इंदौर: कर्बला मैदान मेले पर हाईकोर्ट की मुहर, MIC का अनुमति निरस्त करने का फैसला रद्द

इंदौर में कर्बला मैदान पर लगने वाले मेले को हाईकोर्ट ने अनुमति दे दी है। महापौर परिषद ने वर्चुअल बैठक के दौरान यह फैसले लिया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने मेले की रोक हटा दिया है। अवकाश के दिन हुई सुनवाई में कोर्ट ने परिषद का आदेश रद्द करते हुए निगमायुक्त की अनुमति बहाल रखी। इसके बाद तीन दिवसीय मेले की तैयारियां फिर से शुरू कर दी गई है।

इंदौर में कर्बला मैदान पर जिस जगह ताजिए ठंडे होते हैं, वहां हर साल मेला भी लगता है। आठ माह पहले इसका मामला कोर्ट में गया था। मेले की जमीन का केस जीतने के बाद इस जमीन पर नगर निगम का स्वामित्व है। इस साल मेले की अनुमति मेयर की ओर से नहीं दी गई थी, लेकिन निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने मेले की अनुमति दे दी। इसे लेकर देर शाम मेयर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में मेयर-इन-काउंसिल की वर्चुअल बैठक हुई, जिसमें मेले की अनुमति निरस्त करने का निर्णय लिया गया था, परिषद ने स्पष्ट किया था कि स्थल पर केवल ताजिए ठंडे करने की अनुमति रहेगी।

हाईकोर्ट ने यह कहा – हाईकोर्ट की और से कहा गया कि मेले की मंजूरी हो गई थी इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई थी। अचानक एमआईसी ने मंजूरी निरस्त की और इसमें सम्बंधित पक्षकार को बिना नोटिस जारी करे निर्णय लेना गलत है। ऐसे परंपरागत मंजूरी को नहीं रेखा जा सकता है। मेले की तैयारियां शुरू कर दी गई थी और मेला शुरू हो चूका था। ऐसे में बिना नोटिस दिए मंजूरी को निरस्त नहीं किया जा सकता। ऐसे में याचिका मंजूरी की जाती है और एमआईसी के 25 जून के निर्णय का फैसला लेना गलत है।

महापौर परिषद की बैठक में फैसला

महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई की धोबी घाट पर ताजिए ठंडे करने के साथ ही मेला लगाने की भी अनुमति प्रदान की गई है। उक्त अनुमति के संबंध में मेयर इन काउंसिल की वर्चुअल मीटिंग आयोजित की गई। मीटिंग में निर्णय लिया गया कि विगत वर्ष स्थल पर ताजिये ठंडा करने के साथ ही मेला लगाने की अनुमति दी गई थी, किंतु आयोजको को जिन शर्तों पर अनुमति दी गई थी उन शर्तों का पालन नहीं किया गया और शर्तों का उल्लंघन किया गया। साथ ही मेले से संबंधित जो राशि जो निगम में जमा करनी थी वह भी जमा नहीं कराई गई उपरोक्त स्थिति और अनुभव को ध्यान में रखते हुए मेयर इन काउंसिल द्वारा वर्चुअल बैठक में निर्णय लिया गया कि धोबी घाट पर ताजिए ठंडा करने की केवल अनुमति दी जाए। जो मेला लगाने की अनुमति दी गई है उसे निरस्त किया जाए।

पहले महापौर ने अनुमति से किया था इनकार

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो दिन पहले कहा था कि धोबी घाट की जमीन निगम के स्वामित्व की है। कोर्ट ने सितंबर 2024 में ही इस पर मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया है कि 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने की अनुमति रहेगी, शेष जमीन निगम की है। निगम अब तक मेले की अनुमति देता था, लेकिन इस बार हमने कई कारणों से तय किया है कि मेले के लिए जमीन देने सही नहीं है।

वर्ष 2024 में जीता था निगम

धोबी घाट की 6.7 एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय कोर्ट में विवाद चला। सितंबर 2024 में जिला कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए साफ किया था कि यह जमीन नगर निगम के स्वामित्व की है। कोर्ट ने इस 6.7 एकड़ जमीन में से सिर्फ 0.02 एकड़ जमीन ताजिए ठंडा करने के लिए होने की बात कही थी। कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया था कि 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने की अनुमति रहेगी, शेष जमीन इंदौर नगर निगम की है।की अनुमति रहेगी, शेष जमीन इंदौर नगर निगम की है।

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