राहुल गांधी मानहानि केस में समझौते के संकेत, हाईकोर्ट में पेश किए दस्तावेज और माफी
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच के समक्ष राहुल गांधी बनाम कार्तिकेय सिंह चौहान मानहानि प्रकरण की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय दुबे ने न्यायालय को बताया कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। राहुल गांधी की ओर से कहा गया कि शिवराज सिंह चौहान के लिए नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनके बेटे के लिए बयान दिया था।
सभी दस्तावेज में कोर्ट में प्रस्तुत किए , माफ़ी भी मांगी
उन्होंने समझौते से संबंधित दस्तावेज भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए और कहा कि अब केवल औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया शेष है। इस जानकारी के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि लंबे समय से चल रहा यह विवाद जल्द ही समाप्त हो सकता है। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से यह भी बताया गया कि भोपाल की निचली अदालत ने उन्हें 25 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
अधिवक्ता ने कोर्ट से निवेदन किया कि समझौते की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए लगभग 10 से 12 दिन का समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ चुके है और जल्द ही आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी हो जाएंगे।
राहुल का दावा है कि, बयान शिवराज और कार्तिकेय के लिए नहीं था
सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से एक महत्वपूर्ण दावा भी किया गया। उनके अधिवक्ता ने कहा कि जिस कथित बयान को लेकर यह पूरा विवाद शुरु हुआ था, वह वास्तव में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान के संदर्भ में नहीं दिया गया था। उनका कहना था कि वह बयान छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके बेटे के संदर्भ में था। हालांकि इस दावे पर न्यायालय की विस्तृत टिप्पणी और आदेश अभी सामने आना बाकी है।
यह था पूरा मामला?
यह विवाद राहुल गांधी द्वारा वर्षों पहले दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा है। कार्तिकेय सिंह चौहान ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, जिसके बाद उनके द्वारा मानहानि की शिकायत दायर की गई थी। इसी शिकायत के आधार पर भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में कार्यवाही शुरु हुई और बाद में समन जारी किए गए। राहुल गांधी ने इस समन आदेश और पूरी कार्यवाही को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विवेक तन्खा-शिवराज समझौते जैसी स्थिति
राजनीतिक और कानूनी गलियारों में इस घटनाक्रम को पूर्व में हुए विवेक तन्खा और शिवराज सिंह चौहान के बीच समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। उस मामले में भी दोनों पक्षों ने संसद परिसर में मुलाकात के बाद विवाद समाप्त करने का निर्णय लिया था और इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई थी।
अब राहुल गांधी और कार्तिकेय सिंह चौहान के मामले में भी लगभग वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जहां कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।
विस्तृत आदेश का इंतजार
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश आना बाकी है। आदेश सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय ने समझौते की जानकारी और पक्षकारों के निवेदन पर क्या रुख अपनाया है।
