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ट्विशा केस: जेल में ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती मिलीं गिरिबाला सिंह, महिला आयोग से बोलीं- कोई परेशानी नहीं

भोपाल। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों मोर्चों पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर मामले की आरोपी और सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह से मुलाकात की, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दिल्ली एम्स द्वारा तैयार की गई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई है।

महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल में गिरिबाला सिंह से बातचीत कर उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान गिरिबाला सिंह देवदत्त पटनायक की चर्चित पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। आयोग की टीम को देखकर उन्होंने पुस्तक बंद कर दी।

रेखा यादव ने बताया कि बातचीत के दौरान गिरिबाला सिंह ने किसी भी प्रकार की परेशानी या विशेष शिकायत नहीं बताई। उन्होंने कहा कि जेल में उन्हें कोई समस्या नहीं है और सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं। आयोग की टीम ने महिला वार्ड, अस्पताल, पुस्तकालय, रसोईघर, ब्यूटी पार्लर और आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर का भी निरीक्षण किया। प्रारंभिक तौर पर ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस बीच, ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई को एम्स दिल्ली की दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। एजेंसी अब मेडिकल, फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों का आपस में मिलान कर रही है। जांच का मुख्य फोकस प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर है।

सीबीआई की विशेष टीम मोबाइल फोन, लैपटॉप, कॉल रिकॉर्ड, चैट, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डिजिटल डेटा की भी जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य मामले की कई अहम कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मामले में एक नया कानूनी पहलू भी सामने आया है। गिरिबाला सिंह की ओर से जिला अदालत में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की अधिवक्ता रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया है। चूंकि दोनों अधिवक्ता विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं, इसलिए अदालत ने संबंधित प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

वहीं, ट्विशा शर्मा के परिजनों के अधिवक्ता अंकुर पांडे ने जांच के शुरुआती चरण में हुई कथित अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रारंभिक जांच अधिकारी और तत्कालीन एसआई दिनेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने दावा किया कि घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट दिखाई दे रही थीं, लेकिन पुलिस ने केवल एक बेल्ट को जब्त कर जांच में शामिल किया।

परिजनों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि केस डायरी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज समय से पहले आरोपियों तक पहुंच रहे थे, जिससे उन्हें अग्रिम जमानत प्रक्रिया में लाभ मिला। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

गौरतलब है कि सीबीआई फिलहाल केवल ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। एजेंसी मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और फोरेंसिक रिपोर्टों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डिजिटल जांच के निष्कर्ष आने के बाद मामले में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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