मध्य प्रदेश में मानसून 10 दिन लेट, 44% कम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से इसके आगमन में देरी हो रही है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार अब मानसून के 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश करने की संभावना है। सामान्य तौर पर मानसून 15 जून तक प्रदेश में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी चाल सुस्त रहने से मौसम वैज्ञानिक भी नजर बनाए हुए हैं।
44 प्रतिशत कम बारिश, 45 जिले पीछे
मानसून की देरी का असर प्रदेश की वर्षा पर साफ दिखाई दे रहा है। जून माह में अब तक प्रदेश में सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। स्थिति यह है कि 55 में से 45 जिले वर्षा के मामले में पिछड़ गए हैं।
सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश में देखने को मिला है। जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में सामान्य से लगभग 65 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में भी वर्षा का आंकड़ा औसत से 27 प्रतिशत कम है।
भोपाल सबसे आगे, अलीराजपुर में शून्य बारिश
प्रदेश की राजधानी भोपाल वर्षा के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला रहा है। यहां सामान्य से 62 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। अब तक भोपाल में करीब 4 इंच वर्षा हो चुकी है, जबकि सामान्य औसत लगभग ढाई इंच है।
इसके विपरीत अलीराजपुर ऐसा जिला है, जहां अब तक बारिश दर्ज नहीं हुई है।
किसानों की बढ़ी परेशानी
मानसून की देरी से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रदेश में सोयाबीन, मूंग, उड़द और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सफल बुवाई के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक होती है ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके। कई किसानों ने मानसून की उम्मीद में पहले ही बुवाई कर दी थी, लेकिन अब पर्याप्त नमी नहीं मिलने से बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की आशंका बढ़ गई है।
क्यों धीमी हुई मानसून की चाल?
मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र के आसपास सक्रिय है। अरब सागर से आने वाली अनुकूल हवाओं के कमजोर पड़ने के कारण इसकी गति धीमी हुई है। यदि अगले दो-तीन दिनों में मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो मानसून 25 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।
बारिश से कुछ जिलों में मिली राहत
शुक्रवार को राजगढ़, दमोह, रीवा, सतना और मैहर समेत कई जिलों में प्री-मानसून बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
- सिवनी सबसे ठंडा जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.2°C दर्ज किया गया।
- खजुराहो 42.4°C के साथ सबसे गर्म रहा।
प्रमुख शहरों का तापमान:
- भोपाल – 37.3°C
- इंदौर – 35.1°C
- उज्जैन – 36°C
- जबलपुर – 38.8°C
- ग्वालियर – 40°C
38 जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग ने सीहोर और आगर-मालवा में तेज आंधी की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
इसके अलावा भोपाल, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, इंदौर, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ समेत 38 जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई गई है।
इन जिलों में बनी रहेगी उमस
रीवा, सतना, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार और खरगोन जिलों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले सप्ताह अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान मानसून की दस्तक का इंतजार कर रहे हैं।
