MPL 2026: ‘4 साल की उम्र से खेल रहा हूं क्रिकेट, पापा ही मेरे पहले कोच और गुरु हैं’ — पहला शतक जड़ने वाले पार्थ चौधरी की खास बातचीत
इंदौर। मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (एमपीएल 2026) में ग्वालियर चीतास की ओर से खेलते हुए इतिहास रचने वाले सलामी बल्लेबाज पार्थ चौधरी इन दिनों सुर्खियों में हैं। भोपाल लेपर्ड्स के खिलाफ महज 51 गेंदों में 9 चौके और 7 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 107 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलने वाले पार्थ लीग के इतिहास में पहला शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस धमाकेदार पारी के बाद ‘प्रदेश प्रकाश’ ने उनसे खास बातचीत की।
सवाल – पार्थ, आज आपको कैसा लग रहा है? आपने एमपीएल का पहला शतक अपने नाम किया है।
जवाब – बहुत ही बढ़िया लग रहा है। एमपीएल में यह मेरी पहली सेंचुरी (100) है, इसलिए इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनकर काफी अच्छा महसूस हो रहा है।
सवाल – आज आपने मैदान पर उतरते ही सेंचुरी ठोक दी, इस पारी को आप कैसे देखते हैं?
जवाब – जी, आज मैंने शुरुआत में थोड़ा समय लिया था। क्रीज पर थोड़ा वक्त बिताने का फायदा यह हुआ कि मैं अपनी पारी को लंबा खींच पाया और अंत तक टिककर खेल सका।
सवाल – इस मुकाबले को लेकर आपकी क्या रणनीति थी?
जवाब – ईमानदारी से कहूं तो कोई विशेष रणनीति नहीं थी। मेरा माइंडसेट बिल्कुल साफ रहता है। मैदान पर हमेशा पॉजिटिव इंटेंट (सकारात्मक सोच) के साथ उतरना। मेरी सिंपल थ्योरी है कि अगर खराब गेंद मिलती है तो उस पर बाउंड्री मारता हूं, और अगर अच्छी गेंद हो तो उस पर सिंगल लेकर स्ट्राइक रोटेट करता हूं।
सवाल – टूर्नामेंट के पहले ही मैच में टीम को मिली इस शानदार जीत पर क्या कहना चाहेंगे?
जवाब – बहुत ही कमाल का अहसास है। हम अपना पहला ही मैच जीत गए हैं, जिससे टीम का हौसला बहुत बढ़ गया है। मैं यही चाहूंगा कि हमारी टीम आगे भी इसी तरह जीत का सिलसिला बरकरार रखे।
सवाल – टूर्नामेंट के आगामी मैचों के लिए आपकी क्या प्लानिंग है?
जवाब – आगे के मैचों के लिए भी प्लानिंग बिल्कुल सिंपल रहेगी। जैसा आज हम बढ़िया खेले हैं, आगे भी हमारा यही इंटेंट और अप्रोच रहने वाली है।
सवाल – आपने क्रिकेट खेलने की शुरुआत कब से की? आपकी इस यात्रा में किसका सबसे बड़ा हाथ रहा?
जवाब – मैं जब सिर्फ चार साल का था, तब से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। मेरे पापा ही शुरुआत से मेरे कोच रहे हैं, उन्होंने ही मुझे क्रिकेट की हर छोटी-बड़ी तकनीक सिखाई है। आज मैं जो कुछ भी हूं, उन्हीं की बदौलत हूं।
