Garud Puran: क्या सूर्यास्त के बाद करना चाहिए अंतिम संस्कार? जानें गरुड़ पुराण में क्या है मान्यता
Garud Puran: क्या सूर्यास्त के बाद करना चाहिए अंतिम संस्कार? जानें क्या है मान्यता
सनातन धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्मग्रंथों में इससे जुड़े कई नियम बताए गए हैं। इन्हीं में एक प्रमुख मान्यता यह है कि सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह नियम विशेष रूप से Garuda Purana में वर्णित मृत्यु संस्कारों से जुड़ा माना जाता है।
गरुड़ पुराण क्या कहता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पुराण में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद शव का दाह संस्कार करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि दिन का समय शुभ माना जाता है और सूर्य की उपस्थिति में किए गए संस्कार आत्मा की यात्रा के लिए बेहतर माने जाते हैं। यदि रात में मृत्यु हो जाए, तो कई परंपराओं में सूर्योदय तक प्रतीक्षा कर सुबह अंतिम संस्कार करने की सलाह दी जाती है।
क्यों नहीं किया जाता रात में अंतिम संस्कार?
धार्मिक विश्वासों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करने से आत्मा को शांति मिलने में बाधा आ सकती है। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि सूर्यास्त के बाद शुभ कर्मों से बचा जाता है और इसलिए अंतिम क्रिया सुबह की जाती है। हालांकि ये धार्मिक आस्थाएं और पारंपरिक मान्यताएं हैं, जिनका पालन परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
क्या इसके अपवाद भी हैं?
कुछ धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थानों को अपवाद माना गया है। मान्यता है कि कुछ महाश्मशानों में रात में भी अंतिम संस्कार किए जाते हैं, जैसे Manikarnika Ghat, Mahakal Cremation Ground और Pashupatinath Temple के पास स्थित श्मशान घाट।
परंपरा और व्यवहारिकता दोनों अहम
आज के समय में कई शहरों में मेडिकल, कानूनी या व्यावहारिक कारणों से रात में भी अंतिम संस्कार किए जाते हैं। ऐसे मामलों में परिवारजन स्थानीय परंपरा, पुरोहित की सलाह और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेते हैं।






