भारत से चीनी निर्यात पर रोक, नेपाल का जूस-बिस्किट और चॉकलेट उद्योग संकट में
भारत द्वारा चीनी निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद नेपाल के जूस, बिस्किट और चॉकलेट उद्योग में चिंता बढ़ गई है। उद्योगपतियों ने आशंका जताई है कि यदि प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा, तो आने वाले महीनों में इन उद्योगों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
नेपाल में चीनी की मांग पूरी नहीं कर पा रहा घरेलू उत्पादन
उद्योग जगत का कहना है कि नेपाल में घरेलू चीनी उत्पादन बाजार और उद्योगों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में सरकार को समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उद्योग प्रभावित न हों।
हालांकि फिलहाल उद्योगों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन यदि भारत का प्रतिबंध जारी रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। भारत ने कम उत्पादन और प्रतिकूल मौसम का हवाला देते हुए चीनी निर्यात पर रोक लगाई है।
नेपाल में बढ़ीं चीनी की कीमतें
भारतीय सीमावर्ती बाजारों में चीनी की खुदरा कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो के बीच है, जबकि नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में यही कीमत बढ़कर 90 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
आंकड़ों के अनुसार, चालू आर्थिक वर्ष में नेपाल ने करीब 70 हजार मीट्रिक टन चीनी आयात की है।
त्योहारों के समय बढ़ सकता है संकट
चॉकलेट और बिस्किट उद्योग से जुड़े व्यवसायी महेश जाजु ने कहा कि यदि भारत ने निर्यात प्रतिबंध जारी रखा, तो इसका असर करीब पांच महीने बाद साफ दिखाई देने लगेगा। उन्होंने आशंका जताई कि दशैं और तिहार जैसे बड़े त्योहारों के दौरान चीनी की कमी पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जूस, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और चॉकलेट उद्योग, जो चीनी को मुख्य कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करते हैं, सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
प्रतिकूल मौसम से भारत में गन्ना उत्पादन प्रभावित
उद्योगपति सगुन बोहरा के मुताबिक भारत में बेमौसमी बारिश और खराब मौसम के कारण गन्ना उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी उद्योगों पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कुछ महीनों बाद स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
सरकार से वैकल्पिक आयात व्यवस्था की मांग
उद्योग परिसंघ कोशी के अध्यक्ष पवन सारडा ने कहा कि नेपाल का घरेलू उत्पादन कुछ महीनों तक स्थिति संभाल सकता है, लेकिन उसके बाद समस्या गहरा सकती है। उन्होंने सरकार से तीसरे देशों से चीनी आयात को आसान बनाने और कस्टम शुल्क में राहत देने की मांग की।
उद्योगपतियों का कहना है कि दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) की सुविधा न मिलने और बढ़ती ढुलाई लागत के कारण तीसरे देशों से चीनी आयात महंगा पड़ता है। ऐसे में सरकार को समय रहते हस्तक्षेप कर उद्योगों को राहत देनी चाहिए, ताकि नेपाल की खाद्य और कन्फेक्शनरी इंडस्ट्री संकट से बच सके।






