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‘विकसित भारत’ की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार-उद्योग साझेदारी जरूरी: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को ‘विकसित भारत’ की यात्रा को गति देने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उद्योग जगत से लीक से हटकर सुधारों के सुझाव देने का भी आह्वान किया, ताकि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता और आर्थिक मजबूती को नई दिशा मिल सके।

‘विकसित भारत’ के लिए मजबूत साझेदारी पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) के ‘इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट’ को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में आसानी) को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक मजबूत, तेज और प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी है।

वैश्विक अनिश्चितताओं को अवसर में बदलने की अपील

पीयूष गोयल ने मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं को भारत के लिए अवसर बताते हुए कहा कि देश को अपनी सप्लाई चेन मजबूत करने, सुधारों में तेजी लाने और लचीलापन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे घबराने के बजाय सतर्कता और रणनीतिक तैयारी के साथ आगे बढ़ें। मंत्री ने कहा कि भारत ने कोविड-19 जैसी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों से भी अवसर निकाले जा सकते हैं।

स्मार्ट बिजनेस मॉडल और ऊर्जा दक्षता पर जोर

गोयल ने उद्योग जगत को अधिक स्मार्ट और कुशल व्यावसायिक मॉडल अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कचरा कम करना, उत्पादकता बढ़ाना और ऊर्जा दक्षता के उपाय अपनाना आने वाले समय में कारोबार के लिए बेहद अहम होगा।

1800 GCC बना रहे रोजगार का बड़ा आधार

मंत्री ने बताया कि भारत में वर्तमान में करीब 1,800 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) संचालित हो रहे हैं, जो लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और 1 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में तेजी से पहचान रही हैं, जहां युवा और कुशल मानव संसाधन वैश्विक संचालन को मजबूती प्रदान कर रहा है।

निर्यातकों को नए बाजार तलाशने की सलाह

पीयूष गोयल ने निर्यातकों से आगामी मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का सक्रिय लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को नए बाजार तलाशने, सैंपलिंग और ट्रायल ऑर्डर बढ़ाने और समझौतों के लागू होने से पहले ही वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत के पास यह सही समय है कि वह वैश्विक आर्थिक बदलावों को अवसर में बदलकर ‘विकसित भारत’ की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़े।

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