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भारत-नीदरलैंड संबंध बने रणनीतिक साझेदारी, मोदी दौरे में 17 बड़े समझौतों पर मुहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें ‘रणनीतिक साझेदारी’ में अपग्रेड कर दिया है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द हेग में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद रणनीतिक साझेदारी रोडमैप (2026-2030) पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और निवेश सहयोग को मजबूत करना है।

आवागमन, शिक्षा और वीजा प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर

दोनों देशों के बीच पेशेवरों, छात्रों और कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रवासन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने पर सहमति बनी है, जिससे भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स को पढ़ाई, नौकरी और इंटर्नशिप के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

उच्च शिक्षा क्षेत्र में नालंदा यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगेन के बीच साझेदारी हुई है। इससे संयुक्त रिसर्च, डिग्री प्रोग्राम और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

सेमीकंडक्टर, तकनीक और औद्योगिक विकास को बढ़ावा

भारत की औद्योगिक ताकत बढ़ाने के लिए धोलेरा सेमीकंडक्टर फैब परियोजना में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच साझेदारी हुई है। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई को मजबूत करने के लिए भारत के खान मंत्रालय और नीदरलैंड के बीच समझौता किया गया है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और हाईटेक उद्योगों को फायदा मिलेगा।

हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग

भारत और नीदरलैंड ने ‘ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप’ लॉन्च किया है, जिससे अक्षय ऊर्जा, सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग को गति मिलेगी। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।

कृषि, डेयरी और जल प्रबंधन में नई पहल

त्रिपुरा फ्लावर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आधुनिक तकनीक देने में नीदरलैंड सहयोग करेगा, जिससे फूलों की खेती और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वहीं बेंगलुरु स्थित इंडो-डच डेयरी सेंटर को तकनीकी सहायता देने पर भी सहमति बनी है। इससे डेयरी किसानों, पशुपालन और दूध उत्पादन क्षेत्र को नई तकनीक का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा गुजरात की जल परियोजनाओं में तकनीकी सहयोग देने और पेयजल व सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने पर भी सहमति बनी है।

सांस्कृतिक विरासत और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग

नीदरलैंड ने चोल राजवंश के ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत को लौटाए हैं। साथ ही लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स से जुड़े समुद्री विरासत संरक्षण समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए।

स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक जानकारी साझा करने पर जोर दिया है, ताकि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

आतंकवाद पर साझा और सख्त रुख

भारत और नीदरलैंड ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त और साझा रुख दोहराया। दोनों देशों ने आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन न देने, उसकी फंडिंग रोकने और आतंकवादी नेटवर्कों को खत्म करने पर जोर दिया। साथ ही सभी देशों से आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने की अपील की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नीदरलैंड भारत के शीर्ष पांच निवेशकों में शामिल है और पिछले 10 वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में तेजी से मजबूती आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति से द्विपक्षीय संबंधों को और गति मिलेगी।

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