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ईरान का दावा: मिसाइल-ड्रोन हमले में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘अब्राहम लिंकन’ को बनाया निशाना

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) को मिसाइल और ड्रोन हमले में निशाना बनाया है। हालांकि अमेरिका ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु एजेंसी (AA) के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन को निशाना बनाया गया।

आईआरजीसी के मुताबिक इस हमले में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और जहाज को “भारी नुकसान” पहुंचा है। हालांकि संगठन ने नुकसान या संभावित हताहतों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

इसी बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में एक अलग घटना का भी जिक्र किया गया है। अमेरिकी टेलीविजन नेटवर्क CBS ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में एक ईरानी जहाज अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन के काफी करीब पहुंच गया था

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत से उस जहाज की ओर नौसैनिक तोप से गोलीबारी की गई। यह पूरी तरह ऑटोमैटिक तोप आमतौर पर डिस्ट्रॉयर और क्रूजर जहाजों के आगे के हिस्से में लगाई जाती है। शुरुआती गोलीबारी में निशाना चूक गया था और यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि गोलियां चेतावनी के तौर पर चलाई गई थीं या सीधे हमले के लिए।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बाद में हेलफायर मिसाइलों से लैस एक सैन्य हेलीकॉप्टर भेजा गया, जिसने ईरानी जहाज की दिशा में दो मिसाइलें दागीं। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि उस जहाज को कितना नुकसान हुआ या चालक दल की स्थिति क्या है।

जब इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड से प्रतिक्रिया मांगी गई तो रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि फिलहाल उनके पास साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है।

गौरतलब है कि USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group इस समय मध्य-पूर्व में तैनात दो अमेरिकी विमानवाहक पोतों में से एक है। यह समूह जनवरी के अंत में इस क्षेत्र में पहुंचा था, जिसे उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “एक विशाल बेड़ा” बताया था।

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा सकता है

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