तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र में दिखी नई सियासी तस्वीर, मुख्यमंत्री विजय के अंदाज और अन्नाद्रमुक की कलह चर्चा में

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद गठित 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार सुबह शुरू हुआ, जहां नई सरकार, विपक्ष की नई भूमिका और बदलते राजनीतिक समीकरण चर्चा के केंद्र में रहे। मुख्यमंत्री Joseph Vijay के अलग अंदाज से लेकर विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin की मौजूदगी और अन्नाद्रमुक में उभरती अंदरूनी खींचतान तक, पूरे दिन सदन के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज रही।
सुबह 9:30 बजे शुरू हुए विधानसभा सत्र में प्रोटेम स्पीकर Karuppaiah ने नवनिर्वाचित विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कुछ विधायकों को छोड़कर लगभग सभी निर्वाचित सदस्य शपथ प्रक्रिया में शामिल हुए। प्रोटेम स्पीकर ने बताया कि जो विधायक सोमवार को शपथ नहीं ले सके, उन्हें मंगलवार को अवसर दिया जाएगा। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव भी मंगलवार को होगा।
तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में फिलहाल एक सीट रिक्त रहने के कारण सदन में 233 विधायक मौजूद रहे। तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से विधायक चुने गए जोसेफ विजय के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली है। विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी विधायकों को निर्वाचन प्रमाणपत्र साथ लाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मंत्री कीर्तना प्रमाणपत्र भूलने और के.सी. करुप्पनन गलत दस्तावेज लेकर पहुंचने के कारण शपथ नहीं ले सके।
इस बीच मुख्यमंत्री विजय एक बार फिर अपने अलग अंदाज को लेकर सुर्खियों में रहे। तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में जहां सफेद शर्ट और वेष्टी राजनीतिक पहचान का हिस्सा रही है, वहीं विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद विधानसभा सत्र में भी काले रंग का आधुनिक कोट-सूट पहनकर अपनी अलग राजनीतिक छवि का संकेत दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की यह “पावर ड्रेसिंग” नई पीढ़ी की राजनीति और आधुनिक नेतृत्व शैली को दर्शाती है।
सत्र के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस दृश्य की रही, जब मुख्यमंत्री विजय और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन आमने-सामने बैठे दिखाई दिए। सदन में एक ओर युवा मुख्यमंत्री सरकार की कमान संभालते नजर आए, तो दूसरी ओर लगभग समान आयु वर्ग के उदयनिधि विपक्ष की भूमिका निभाते दिखे। इसे तमिलनाडु की राजनीति में नई पीढ़ी के नेतृत्व और आने वाले वर्षों की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, प्रमुख विपक्षी दल All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (अन्नाद्रमुक) में बढ़ती अंदरूनी कलह भी चर्चा का बड़ा विषय बनी रही। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय की सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर पार्टी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि 47 सीटें जीतने वाली अन्नाद्रमुक के करीब 36 विधायक Edappadi K. Palaniswami (ईपीएस) के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और विश्वास मत के दौरान विजय सरकार को समर्थन देने के पक्ष में हैं। बागी विधायकों का मानना है कि भाजपा के साथ गठबंधन पार्टी की हार का प्रमुख कारण बना, जिसके चलते अब पार्टी के भीतर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने की मांग भी तेज हो रही है।
विधायक दल के नेता के चयन को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। हालांकि ईपीएस के समर्थन में 17 विधायकों ने विधानसभा सचिव और अस्थायी अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर उन्हें विधायक दल का नेता बनाए रखने की मांग की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अन्नाद्रमुक के भीतर नेतृत्व संघर्ष और तेज हो सकता है, जिसका असर राज्य की विपक्षी राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।






