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बांग्लादेश हाईकोर्ट से हिन्दू संत चिन्मय ब्रह्मचारी को झटका, अलिफ हत्याकांड में जमानत देने से इनकार

बांग्लादेश में हिन्दू संत Chinmoy Krishna Das Brahmachari को बड़ा कानूनी झटका लगा है। चट्टोग्राम (पूर्व नाम चटगांव) के चर्चित अलिफ हत्याकांड मामले में बांग्लादेश हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। उच्च न्यायालय की बेंच ने पहले जारी आदेश को निरस्त करते हुए फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में जमानत याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस केएम जाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहिर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत में चिन्मय ब्रह्मचारी की ओर से अधिवक्ता अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से डिप्टी अटॉर्नी जनरल शैला शर्मिन और असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल मो. अलामीन पेश हुए।

इससे पहले 30 अप्रैल को हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े राजद्रोह मामले में चिन्मय ब्रह्मचारी को जमानत दी थी। उनके खिलाफ 31 अक्टूबर 2024 को कोटवाली थाने में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि उन्होंने और अन्य आरोपितों ने राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया। इसके बाद 25 नवंबर 2024 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

राजद्रोह मामले में जमानत खारिज होने के बाद 26 नवंबर 2025 को चटगांव कोर्ट परिसर में उनके समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुई थीं। इसी दौरान वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या हुई थी, जिसमें चिन्मय ब्रह्मचारी का नाम भी आरोपितों में शामिल किया गया। इस मामले में एक जुलाई 2025 को पुलिस ने चिन्मय समेत 38 लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।

चिन्मय ब्रह्मचारी नवंबर 2024 से जेल में बंद हैं और फिलहाल चट्टोग्राम जेल में रखे गए हैं। उनके खिलाफ हत्या के मामले के अलावा कई अन्य मुकदमे भी विचाराधीन हैं। इसी वर्ष अप्रैल में एक अन्य भूमि विवाद से जुड़े मामले में उन्हें जमानत मिली थी, लेकिन हत्या मामले में राहत नहीं मिलने से उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

करीब 40 वर्षीय चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी मूल रूप से चटगांव के सतकनिया उपजिला के निवासी हैं और वर्ष 2007 से हथाजारी स्थित पुंडरीक धाम के प्रमुख रहे हैं। वह Sanatan Jagaran Mancha के संस्थापक भी हैं, जिसने बांग्लादेश में हिन्दू समुदाय पर कथित उत्पीड़न के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद ढाका और चटगांव में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।

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