शिमला रोपवे परियोजना: 13 स्टेशनों वाला मेगा नेटवर्क, लागत बढ़कर ₹2,980 करोड़ पहुंची

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी Shimla में बढ़ते ट्रैफिक दबाव से निपटने के लिए प्रस्तावित रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को अब अंतिम वित्तीय मंजूरी का इंतजार है।
परियोजना की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले इसकी अनुमानित लागत करीब ₹1,556 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग ₹2,980 करोड़ तक पहुंच गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार का वित्तीय हिस्सा भी बढ़कर करीब ₹540 करोड़ हो गया है।
यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जाएगी। Department of Economic Affairs से इसे पहले ही नीतिगत मंजूरी मिल चुकी है, जबकि अब राज्य स्तर पर वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है।
सरकार 80:20 के फंडिंग मॉडल के तहत 80 प्रतिशत राशि बाहरी स्रोतों से जुटाने की योजना बना रही है और इसके लिए New Development Bank से सहयोग लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
करीब एक दशक से लंबित इस परियोजना को अक्टूबर 2025 में वन स्वीकृति मिलने के बाद नई गति मिली। लगभग छह हेक्टेयर भूमि उपयोग की अनुमति मिल चुकी है और तकनीकी प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ चुकी हैं।
प्रस्तावित रोपवे करीब 13.65 किलोमीटर लंबा होगा और इसे बड़े शहरी रोपवे नेटवर्क में गिना जाएगा। इसमें 660 केबिन होंगे, जिनमें प्रत्येक में 10 यात्री बैठ सकेंगे। हर दिशा में प्रति घंटे लगभग 3,000 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी और हर 2–3 मिनट में केबिन उपलब्ध रहेगा।
इस परियोजना के तहत तारा देवी, टूटीकंडी, आईएसबीटी, विक्ट्री टनल, रेलवे स्टेशन, सचिवालय, संजौली और आईजीएमसी सहित कुल 13 स्थानों को जोड़ा जाएगा। इससे शहर के भीतर यातायात तेज और सुगम होने की उम्मीद है, खासकर पर्यटन सीजन में लगने वाले जाम से राहत मिल सकती है।
पहाड़ी भू-भाग के कारण Shimla में सड़क विस्तार सीमित है, ऐसे में रोपवे जैसी वैकल्पिक परिवहन प्रणाली दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है। यह न केवल ट्रैफिक दबाव कम करेगी, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प मानी जा रही है।
हालांकि, आर्थिक दबाव और फंडिंग की चुनौतियों के चलते परियोजना की प्रगति में समय लग सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि वह इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही वित्तीय समाधान तलाशने की दिशा में काम कर रही है।






