सम्राट चौधरी होंगे बिहार के नए मुख्यमंत्री, 15 अप्रैल को लेंगे शपथ

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। Samrat Chaudhary को भारतीय जनता पार्टी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब वे राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उनका शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को होगा।
करीब दो दशकों तक सत्ता में रहे Nitish Kumar के इस्तीफे के साथ ही राज्य में ‘नीतीश युग’ का अंत हो गया है और एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत हो रही है।
🏛️ राजनीतिक सफर
सम्राट चौधरी का जन्म मुंगेर जिले में हुआ और उन्हें राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापकों में रहे हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Lalu Prasad Yadav के नेतृत्व में की और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में मंत्री भी बने।
बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और तेजी से संगठन में अपनी पकड़ मजबूत की।
- 2019: भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष
- 2020: विधान परिषद सदस्य
- 2022: नेता प्रतिपक्ष (परिषद)
- 2023: बिहार भाजपा अध्यक्ष
- 2024-25: उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री
⚖️ सख्त प्रशासनिक छवि
गृह मंत्री रहते हुए उन्होंने अपराध के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। “या तो अपराध छोड़ो या बिहार” जैसे बयान ने उनकी सख्त छवि को मजबूत किया।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘अभय ब्रिगेड’ और ‘पिंक पुलिसिंग’ जैसी पहल और डायल 112 के रिस्पॉन्स टाइम में सुधार उनके प्रमुख फैसलों में शामिल रहे।
📊 जातीय समीकरण में बदलाव
सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण ओबीसी वर्ग माना जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा ने उन्हें आगे कर ‘लव-कुश’ समीकरण में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई है, जो लंबे समय तक नीतीश कुमार की राजनीति की ताकत रहा है।
🔄 नई राजनीतिक दिशा
राजग की बैठक के बाद उनकी ताजपोशी की औपचारिक घोषणा होगी। यह बदलाव बिहार में सत्ता और सामाजिक समीकरणों के नए संतुलन की ओर इशारा करता है।
अब सबकी नजरें 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह और नई सरकार की नीतियों पर टिकी हैं, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और विकास की नई दिशा तय होगी।






