उज्जैन में साइंस सेंटर का लोकार्पण आज, Mohan Yadav, Dharmendra Pradhan और Gajendra Singh Shekhawat रहेंगे मौजूद

मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और वैज्ञानिक केंद्र Ujjain में आज नव-निर्मित साइंस सेंटर का भव्य लोकार्पण किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav, केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री Gajendra Singh Shekhawat विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस कार्यक्रम के साथ ही तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का भी शुभारंभ होगा, जो 5 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा।
मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के डायरेक्टर जनरल डॉ. अनिल कोठारी के अनुसार, सुबह 10 से 10:30 बजे के बीच साइंस सेंटर का उद्घाटन होगा। इसके बाद महाकाल थीम आधारित प्रदर्शनी और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन तारामंडल परिसर में किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में Indian Space Research Organisation (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत सहित कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे।
करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बने इस साइंस सेंटर में गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन हॉल, हेरिटेज थीम गैलरी और आधुनिक एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना है।
सम्मेलन के दौरान यूएवी (ड्रोन), रिमोट कंट्रोल तकनीक, सैटेलाइट निर्माण, सूर्य के सनस्पॉट का अवलोकन, टेलीस्कोप से आकाश अध्ययन और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इसके साथ ही Dongla को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान्ह रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। प्राचीन काल में खगोल और काल गणना के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन को फिर से ‘टाइम स्केल सेंटर’ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह सम्मेलन आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर केंद्रित रहेगा, जिसमें स्पेस इकोनॉमी, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स, कॉस्मोलॉजी और काल गणना पद्धति जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा।
सम्मेलन में NITI Aayog, Council of Scientific and Industrial Research (सीएसआईआर), Defence Research and Development Organisation (डीआरडीओ), आईआईटी इंदौर सहित देश-विदेश के कई प्रमुख संस्थानों की सहभागिता रहेगी।
तीन दिवसीय आयोजन में टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, पैनल चर्चा, डोंगला वेधशाला भ्रमण, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र होंगे।
गौरतलब है कि प्राचीन काल में महान खगोलविद Varahamihira ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का प्रमुख केंद्र बनाया था। वहीं, आधुनिक भारत में Vikram Sarabhai के विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उज्जैन में आयोजित यह आयोजन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को नई दिशा देने के साथ ही भारत को अंतरिक्ष विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में और सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम पहल साबित होगा।






