चैत्र अमावस्या 18 मार्च को: पितृ तर्पण, दान-पुण्य और साधना का विशेष संयोग

हिंदू पंचांग के अनुसार 18 मार्च को चैत्र अमावस्या (दर्श अमावस्या) का पावन संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ किए गए धार्मिक कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है और पितरों का आशीर्वाद जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
पितृ तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और जल अर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य बृजेशचंद्र दुबे के अनुसार, “दर्श अमावस्या पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है। इस दिन विधिपूर्वक तर्पण करने से पितृ दोष दूर होता है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”
वहीं पंडित राजेश चौबे का कहना है कि जो लोग नियमित रूप से पितरों का तर्पण नहीं कर पाते, उनके लिए दर्श अमावस्या एक श्रेष्ठ अवसर होता है। इस दिन की गई पूजा से पितर प्रसन्न होकर वंशजों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं।
दान-पुण्य का भी विशेष महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अमावस्या के दिन स्नान, जप-तप और दान-पुण्य करने से कई जन्मों के पापों का क्षय होता है। इस दिन जल, अन्न और वस्त्र का दान विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
18 मार्च के प्रमुख मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित भरत शास्त्री के अनुसार इस दिन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे—
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:40 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53 बजे तक
अमृत काल: रात 9:37 से 11:10 बजे तक
निशीथ मुहूर्त: रात 12:05 से 12:53 बजे तक
इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा।
राहुकाल: दोपहर 12:29 से 2:00 बजे तक
यमगंड: सुबह 7:58 से 9:28 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:59 से 12:29 बजे तक
दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक
तिथि और नक्षत्र
सूर्योदय: सुबह 6:28 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:31 बजे
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी: सुबह 8:25 बजे तक
इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र: सुबह 5:21 बजे तक
इसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रभावी होगा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह दिन आत्मशुद्धि, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और जीवन में संतुलन स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। श्रद्धा और नियम के साथ किए गए कर्म पितरों को शांति देते हैं, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।






