शिक्षा का उद्देश्य है समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना : राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू के 7वें दीक्षांत समारोह में हुए शामिल
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू का 7वां दीक्षांत समारोह बुधवार को राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह की शुरुआत डॉ. भीमराव अम्बेडकर और महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। संविधान दिवस के अवसर पर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन भी किया गया, जिसने कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायी बना दिया। दीक्षांत समारोह में कुल 16 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई।
राज्यपाल श्री पटेल ने विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के मंत्र को याद दिलाते हुए युवाओं से सामाजिक न्याय, समरसता और समान अवसरों वाले भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान अंतिम पंक्ति तक खड़े व्यक्ति के उत्थान में उपयोग होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनें।
समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों का आजीवन सम्मान करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि माता-पिता के त्याग और संघर्ष से ही जीवन में प्रगति संभव होती है, और उनका सम्मान ही राष्ट्र और समाज की सच्ची सेवा की पहली सीढ़ी है।
मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने महू की ऐतिहासिक महत्ता और विश्वविद्यालय के सामाजिक परिवर्तन में योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोधार्थियों के कार्यों को सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के समाधान में उपयोगी बताया। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को अपने शोध को जनहित और राज्य की विकास योजनाओं से जोड़ने की सलाह दी, वहीं विधायक सुश्री उषा ठाकुर ने उपाधिप्राप्त विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
समारोह में सारस्वत अतिथि डॉ. रविंद्र कन्हेरे और कुलगुरु डॉ. रामदास आत्राम ने भी संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के शोध कार्यों का प्रभाव पुस्तकों तक सीमित न रहकर गाँवों, खेतों और बस्तियों तक पहुँचना चाहिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ‘स्मारिका’ का विमोचन किया गया तथा कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा ने आभार व्यक्त किया।





