ग्वालियर – शिक्षा की सार्थकता तभी जब वंचित और गरीब लोगों को साथ लेकर चलेंगे : राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल कौशल और विशेषज्ञता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षा की वास्तविक सार्थकता तभी है जब विद्यार्थी अपने जीवन पथ पर वंचित और गरीब व्यक्तियों को साथ लेकर चलें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और सभ्य समाज वही होता है, जिसमें पिछड़े लोगों के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता हो।
राज्यपाल श्री पटेल जीवाजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों, पालकों और गुरुजनों को शुभकामनाएँ दीं। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल श्री पटेल ने की, जबकि विद्या भारती के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष अवनीश भटनागर मुख्य अतिथि रहे।
समारोह में 89 विद्यार्थियों को पीएचडी, 43 विद्यार्थियों को 61 गोल्ड मेडल और 132 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचने के बाद भी अपने पालकों और गुरुजनों को न भूलें और समाज व राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।
राज्यपाल श्री पटेल ने जीवाजी विश्वविद्यालय को नैक से ए++ ग्रेड और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से श्रेणी-1 प्राप्त करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक और प्रशासनिक उन्नयन के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ 4 एमओयू किए हैं।
साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा “ट्रायबल चेयर” की स्थापना, पाँच जनजातीय गाँवों को गोद लेने, सिकल सेल स्वास्थ्य जाँच शिविर और औषधि वितरण जैसी पहलों को भी सराहनीय बताया। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों के साथ ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने और साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की दिशा में भी काम करना चाहिए।






