केआईबीजी 2026: प्रसन्ना बेंद्रे ने पेंचक सिलाट में बरकरार रखी बादशाहत, सिर्फ 20 दिनों में नए वजन वर्ग में रचा इतिहास

दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव के स्टार पेंचक सिलाट खिलाड़ी प्रसन्ना बेंद्रे ने एक बार फिर अपने जज़्बे और मेहनत से इतिहास रच दिया। खेलो इंडिया बीच गेम्स (केआईबीजी) 2026 में उन्होंने टांडिंग स्पर्धा में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की।
खास बात यह रही कि प्रसन्ना को यह उपलब्धि सिर्फ 20 दिनों में नया वजन वर्ग अपनाकर हासिल करनी पड़ी।
⚖️ वजन वर्ग बदला, लेकिन हौसला नहीं
प्रसन्ना अपने घरेलू मैदान पर 40-45 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक का बचाव करना चाहते थे, लेकिन प्रतियोगिता से ठीक पहले वजन वर्गों में बदलाव कर दिया गया। केआईबीजी 2026 में यह वर्ग शामिल नहीं था।
उनके सामने दो ही विकल्प थे—
✔️ 50-55 किग्रा वर्ग में उतरना
❌ या फिर प्रतियोगिता से बाहर होना
23 वर्षीय खिलाड़ी ने हार मानने के बजाय चुनौती को स्वीकार किया।
🥇 फाइनल में मणिपुर के रोहित मैतेई को हराया
सिर्फ 20 दिनों में वजन बढ़ाने और खुद से ज्यादा ताकतवर खिलाड़ियों से भिड़ने के बावजूद प्रसन्ना ने शानदार प्रदर्शन किया।
उन्होंने घोघला बीच, दीव में खेले गए फाइनल में मणिपुर के रोहित मैतेई को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
🧠 मानसिक और शारीरिक परीक्षा
प्रसन्ना ने साई मीडिया से बातचीत में कहा—
“श्रीनगर में राष्ट्रीय कैंप से लौटने पर पता चला कि मेरा वजन वर्ग नहीं होगा। खेलों में सिर्फ 20 दिन बचे थे। प्रतिद्वंद्वी मुझसे ज्यादा ताकतवर थे, लेकिन मेरे पास वजन वर्ग बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”
वजन बढ़ाने के लिए उन्होंने खास डाइट अपनाई—
“मैंने खजूर, केला, अंजीर और दूसरी चीजों से शेक बनाकर दिन में दो बार पीना शुरू किया। किसी तरह 50-51 किलो तक पहुंच पाया।”
🥈 पहले भी दिखा चुके हैं दम
केआईबीजी 2026 में स्वर्ण से पहले प्रसन्ना ने पुरुष सीनियर तुंगगल स्पर्धा में रजत पदक भी जीता।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोच एलेक्जेंडर और फिलिया थॉमस को दिया, जिन्होंने नए वजन वर्ग में भी उनकी तकनीक पर भरोसा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
🥋 ट्यूशन से शुरू हुआ पेंचक सिलाट का सफर
प्रसन्ना का खेल से जुड़ाव भी दिलचस्प रहा।
“कक्षा 8 में मैं ट्यूशन के लिए जाता था, वहीं कोच के मार्शल आर्ट्स बैकग्राउंड के बारे में पता चला। उसी समय ऑनर अकादमी की शुरुआत हुई और मैं उसका पहला छात्र बना।”
🌍 अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान
🏆 विश्व चैंपियनशिप 2024 (अबू धाबी): टॉप-8
🥉 एशियन चैंपियनशिप 2023 (दुबई): कांस्य
🥈 एशियन चैंपियनशिप 2022 (कश्मीर): रजत
💰 संघर्षों से भरा सफर
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए आर्थिक संघर्ष भी कम नहीं रहे।
“अबू धाबी जाने के लिए पिता को करीब एक लाख रुपये का कर्ज लेना पड़ा। बाकी पैसे फंडरेज़र से जुटाए गए। वह कर्ज आज भी चल रहा है।”
🎓 पढ़ाई, जिम्मेदारी और भविष्य
माधव विश्वविद्यालय, राजस्थान से मनोविज्ञान में मास्टर्स कर चुके प्रसन्ना अब
खेल
परिवार की जिम्मेदारी
और नौकरी
तीनों पर फोकस कर रहे हैं।
“पिता अगले साल रिटायर हो रहे हैं, इसलिए परिवार की जिम्मेदारी मुझे उठानी होगी। नौकरी तलाशना मेरी प्राथमिकता है।”






