Vikramotsav 2026: वाराणसी में आज से सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य मंचन

Vikramotsav 2026 के अंतर्गत आज से Varanasi में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य मंचन शुरू हो रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाना है।
इस तीन दिवसीय महानाट्य का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की उपस्थिति में होगा।
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आयोजित इस महानाट्य की परिकल्पना मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा की गई है। पद्मश्री Bhagwatilal Rajpurohit द्वारा रचित, राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाट्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
इस भव्य आयोजन में 200 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं, जिनके माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, विक्रम-बेताल की कथाएं, राजतिलक और सनातन धर्म के उत्थान की गाथाएं मंचित की जाएंगी।
भव्य मंच और जीवंत दृश्य होंगे आकर्षण
महानाट्य को प्रभावशाली बनाने के लिए तीन विशाल मंच तैयार किए गए हैं। इनमें सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। साथ ही नवरत्नों जैसे Kalidasa और Varahamihira की विद्वता को भी दर्शाया जाएगा।
कार्यक्रम में 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत प्रस्तुति दी जाएगी। महाकाल मंदिर की झांकी और भस्म आरती का दिव्य दृश्य भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।
आधुनिक तकनीक और भव्य व्यवस्थाएं
मंचीय प्रभाव को और सशक्त बनाने के लिए अत्याधुनिक ग्राफिक्स, 400 से अधिक लाइट्स, विशाल एलईडी स्क्रीन और भव्य आतिशबाजी का उपयोग किया जाएगा। आयोजन स्थल पर 10 से 15 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगी वैदिक घड़ी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा Kashi Vishwanath Temple में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित की जाएगी। इस घड़ी का निर्माण वैदिक काल गणना के आधार पर किया गया है, जिसमें सूर्योदय आधारित समय, पंचांग, ग्रह स्थिति और अन्य खगोलीय जानकारी शामिल है।
गौरतलब है कि इस घड़ी का लोकार्पण वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा उज्जैन में किया गया था।
यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत, विज्ञान और परंपरा के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभर रहा है, जो देश-विदेश के दर्शकों को आकर्षित करेगा।






