वनरक्षक ऐप पर विवाद: भोपाल से मार्गदर्शन तक फील्ड स्टाफ अटेंडेंस पर रोक; ऐप से हाजिरी अनिवार्य

धार। वन मंडल में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू किए जा रहे ई-एचआरएमएस और वनरक्षक ऐप को लेकर वन विभाग और कर्मचारियों के बीच चल रहा गतिरोध फिलहाल बरकरार है। वन मंडलाधिकारी विजयानंदम टीआर और राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक में कर्मचारियों की आपत्तियों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के बाद DFO ने स्पष्ट किया कि जब तक भोपाल स्थित वन मुख्यालय से इस संबंध में मार्गदर्शन नहीं मिल जाता, तब तक फील्ड स्टाफ की ऐप आधारित अटेंडेंस पर रोक रहेगी। इस दौरान वनरक्षक और अन्य फील्ड कर्मचारी पहले की तरह पारंपरिक रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे।
वनरक्षकों की ड्यूटी दिन-रात, ऐप पर पंच-इन-पंच-आउट का विरोध
कर्मचारियों का मुख्य विरोध ऐप के माध्यम से पंच-इन और पंच-आउट करने की अनिवार्यता को लेकर है। राज्य कर्मचारी संघ का कहना है कि वनरक्षकों की ड्यूटी दिन-रात और अलग-अलग जंगल क्षेत्रों में होती है। ऐसे में निश्चित समय पर ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करना व्यावहारिक नहीं है।
कर्मचारियों ने जंगल के दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की समस्या के साथ मोबाइल और डेटा की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि नेटवर्क नहीं होने या तकनीकी समस्या के कारण यदि ऐप पर अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती है तो इसका असर कर्मचारियों के वेतन पर पड़ सकता है।
बिना संसाधन ऐप व्यवस्था लागू नहीं करने की मांग
राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कर्मचारी शासन की मंशा के अनुसार काम करने को तैयार हैं, लेकिन बिना पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण, सरकारी मोबाइल और डेटा की सुविधा के ऐप आधारित व्यवस्था नहीं थोपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जंगलों में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए नेटवर्क और तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। तकनीकी खामी के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर कर्मचारियों को नुकसान नहीं होना चाहिए।

सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
बैठक में वन कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। राठौड़ ने कहा कि जंगलों में सागौन तस्करों के हौसले बुलंद हैं। पर्याप्त संसाधनों के अभाव में कई बार फील्ड कर्मचारियों को जोखिम उठाकर काम करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि विभाग को ऐप आधारित अटेंडेंस के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और आवश्यक संसाधनों पर भी ध्यान देना चाहिए। संगठन कर्मचारी हित में विभाग से संवाद कर रहा है, इसलिए कर्मचारी संगठनों के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
भोपाल से निर्णय आने तक रजिस्टर में अटेंडेंस
DFO विजयानंदम ने बताया कि बैठक में कर्मचारियों के संशयों और आपत्तियों को सुना गया है। भोपाल मुख्यालय से मार्गदर्शन आने तक फील्ड स्टाफ की ऐप से अटेंडेंस पर रोक रहेगी। कर्मचारी फिलहाल पहले की तरह रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करेंगे।
हालांकि दफ्तरी कर्मचारियों के लिए ऐप से अटेंडेंस अनिवार्य रहेगी। छुट्टी, एसीआर और एपीएआर से संबंधित प्रक्रिया भी ऐप के माध्यम से ही संचालित होगी।

जंगलों में गश्ती जारी रखने पर सहमति
बैठक में वनों में अतिक्रमण और अवैध कटाई रोकने के लिए लगातार पैदल और रात्रि गश्ती जारी रखने पर भी सहमति बनी। विभाग का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों की आपत्तियों के बावजूद जंगलों की सुरक्षा और निगरानी से जुड़े काम प्रभावित नहीं होंगे।
DFO ने बताया कि वनरक्षकों को छह महीने की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें विभागीय नियम-कानून के साथ बेसिक तकनीकी जानकारी भी शामिल होती है। टाइगर रिजर्व में एम-स्ट्रीप्स (M-STRIPS) जैसे ऐप पहले से उपयोग किए जा रहे हैं। इसलिए ऐप आधारित व्यवस्था को बहुत जटिल नहीं माना जा रहा है।
फिलहाल फील्ड स्टाफ की ऐप अटेंडेंस को लेकर अंतिम निर्णय भोपाल मुख्यालय से मिलने वाले मार्गदर्शन के बाद ही होगा।