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उज्जैन में युवा धर्म संसद को संबोधित कर रहे भागवत: कहा- युवा का भविष्य भी धर्म ही सुरक्षित करेगा; बोले- धर्म और रिलिजियस अलग है

उज्जैन। युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि धर्म एक ऐसी कल्पना है जिसका अन्वेषण करने मे जन्मों चले जाएं फिर भी समझ न आएं। धर्म का विचार करने के लिए जब से समझ आने लगे तभी से शुरुआत करना पड़ता है। धर्म ही तुमको सारे सुख देगा और मोक्ष की प्राप्ति कराएगा।

मनुष्य का कर्तव्य यह नहीं है कि इतने जीव काटो और इतनी वनस्पति खाओ की पृथ्वी पर कुछ रहे ही नहीं। मनुष्य निर्माण होने के 7 हजार साल के अंदर 4 हजार जीवों की प्रजातियां और 12 हजार वनस्पतियों की प्रजाति नष्ट हो गई क्योंकि हमने वहां कालोनी बना ली।

जिससे भौतिक जगत और आध्यात्मिक जगत की प्रगति को प्राप्त होते है वह धर्म है। धर्म जीवन से दूर जाने के लिए नहीं है, सबकुछ छोड़ने के लिए नहीं है बल्कि धर्म यह है कि हमारे पास सबकुछ हो पर हम उससे मुक्त रहे। भौतिक सुख हो या आध्यात्मिक सुख इसके लिए धर्म चाहिए क्योंकि धर्म हर व्यक्ति के स्वभाव का ध्यान रखकर उसका निर्माण करता है।

बाद में उन्होंने इसे नाम दे दिया रिलिजियस लेकिन धर्म अलग है और रिलिजियस अलग है। रिलिजियस का अर्थ है बांधना और धर्म का अर्थ है धारण करना और बंधनों से मुक्ति करना। हमारा धर्म हमें ज्ञानवान धनवान और दुर्बलों की रक्षा करने का संदेश देता है। युवा का भविष्य भी धर्म ही सुरक्षित करेगा।

वो धर्म है जो विश्व की धारणा करता है। वो नियम है, आप मानो न मानो। आप गुरुत्वाकर्षण मत मानो। आप, न्युटन के जमाने में भी गिरा होगा ऊपर से सेब। तो हम विमान में जाते हैं इधर से उधर, गुरुत्वाकर्षण नहीं है। आपका न कहने से क्या होता है, वो तो है। और कभी-कभी वो उड़ते, उड़ते वस्तु को भी गिरा देता है नीचे।  अंतत: उस नियम के अनुसार चलते हैं तो उसके परे जा सकते हैं नहीं तो नहीं जा सकते।

 

 

 

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