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तमिलनाडु में NEET के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन, चेन्नई समेत सभी जिलों में विरोध; कई दलों का समर्थन

मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा) को समाप्त करने की मांग को लेकर तमिलनाडु में शनिवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन आयोजित किए गए। Dravidar Kazhagam के आह्वान पर हुए इन आंदोलनों में छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

राजधानी Chennai के एग्मोर स्थित राजारथिनम मैदान के पास आयोजित मुख्य प्रदर्शन का नेतृत्व K. Veeramani ने किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए NEET परीक्षा को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि NEET परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए असमान अवसर पैदा करती है। उनका कहना है कि राज्य बोर्ड के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई होती है, जिससे शैक्षणिक और सामाजिक असमानता बढ़ रही है।

द्रविड़ कज़गम नेताओं ने कहा कि हर साल परीक्षा में सामने आने वाली कथित अनियमितताएं, पेपर विवाद और पुनर्परीक्षा जैसे फैसले छात्रों के मानसिक दबाव को बढ़ाते हैं और उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

कई राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन

चेन्नई में आयोजित विरोध प्रदर्शन में Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और उसके सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। द्रमुक की ओर से पार्टी प्रवक्ता टी. के. एस. एलंगोवन ने भाग लिया।

इसके अलावा Viduthalai Chiruthaigal Katchi, Communist Party of India (Marxist), Communist Party of India और Indian Union Muslim League के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी आंदोलन में शामिल हुए।

री-NEET परीक्षा के फैसले के बाद बढ़ा विरोध

गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET परीक्षा के दौरान कई कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद परीक्षा को रद्द कर 21 जून को री-NEET परीक्षा कराने की घोषणा की गई, जिससे छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ गया है।

वहीं, केंद्र सरकार ने अगले वर्ष से NEET परीक्षा को OMR शीट के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के रूप में आयोजित करने की योजना भी घोषित की है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता और परीक्षा संचालन में सुधार होगा, हालांकि विपक्षी दल और छात्र संगठन अभी भी परीक्षा समाप्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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