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आरबीआई की सख्ती से रुपया मजबूत, 12 साल में सबसे बड़ी एक दिन की तेजी दर्ज

भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सट्टेबाजी पर सख्त कार्रवाई के बाद रुपया गुरुवार को 12 वर्षों में अपनी सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।

तीन दिन के अवकाश के बाद बाजार खुलते ही रुपया डॉलर के मुकाबले 1.7 प्रतिशत मजबूत होकर 93.25 के स्तर पर पहुंच गया। यह सितंबर 2013 के बाद की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है।

आरबीआई द्वारा ऑफशोर डेरिवेटिव मार्केट पर नियंत्रण कड़ा करने और बैंकों की स्थानीय मुद्रा स्थिति पर सख्त सीमाएं तय करने के फैसले का सीधा असर मुद्रा बाजार पर पड़ा है।

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर करने से रोक दिया है, साथ ही कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने की अनुमति भी नहीं दी गई है। इसके अलावा, बैंकों की नेट ओपन रुपए पोजिशन पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा तय की गई है।

इस सख्ती का उद्देश्य करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी को नियंत्रित करना और रुपए को स्थिर बनाए रखना है।

हालांकि वैश्विक स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के पश्चिम एशिया को लेकर बयान के बाद बाजारों में दबाव बना हुआ है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।

ब्रेंट क्रूड 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

घरेलू शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिला, जहां सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में करीब 2 प्रतिशत तक गिर गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपए को स्थिर रखने में मदद करेगा।

आरबीआई के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक मुद्रा बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

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