रीवा में जल सत्याग्रह पर बैठे किसान पुत्र की तबीयत बिगड़ी: कहा- पिता जी बोले हैं शहीद हो जाना अपना हक मत छोड़ना

रीवा। जमीन बचाने के लिए धरने पर बैठे किसान पुत्र की तबीयत बिगड़ गई है। आसपास मौजूद युवकों ने उसकी हथेलियों और पैर के तलवों में मालिश की, लेकिन उसने आंदोलन खत्म नहीं किया। कलेक्टर के आश्वासन के बाद भी उसकी मांगों का समाधान नहीं हो सका। इसी वजह से युवक सोमवार को पांचवें दिन दोबारा धरने पर बैठा है।
गुढ़ क्षेत्र में एमपी पावर ट्रांसमिशन पैकेज-दो के तहत हाईटेंशन बिजली के टावर और लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसके तहत बेला समेत आसपास के क्षेत्रों में खेतों से होकर टावर और तार लगाए जा रहे हैं। किसान परिवार का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि पर उचित मुआवजा तय किए बिना काम कराया जा रहा है।
इसी मांग को लेकर युवक ने पहले पानी में आधा डूबकर सत्याग्रह किया था। अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और कलेक्टर के मांगों के निराकरण का आश्वासन देने के बाद उसने अनशन समाप्त किया था। अब उसका कहना है कि आश्वासन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए उसने दोबारा आंदोलन शुरू किया है।
भावुक होकर कहा- जब तक मांग नहीं पूरी होती आंदोलन जारी रहेगा
सोमवार को दोबारा अनशन शुरू करने से पहले युवक भावुक होकर रो पड़ा। उसने कहा, “मेरे पिता ने कहा है कि शहीद हो जाना, लेकिन अपने हक की बात मत छोड़ना।” उसने बताया कि पांच दिनों से खाना नहीं खाने के कारण उसकी मां भी परेशान है। युवक ने कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक वह आंदोलन जारी रखेगा।
जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष ने फोन पर की थी बात
मामले की जानकारी मिलने पर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने युवक से फोन पर बात कर उसकी मांगों की जानकारी ली। पटवारी ने उसके साथ खड़े होने की बात कही। कांग्रेस ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर किसान की शिकायत सुनने और जमीन के मुआवजे का उचित निर्धारण कराने की मांग की है। अनशन के दौरान युवक की हालत बिगड़ने पर आसपास मौजूद लोगों ने उसकी मदद की। वह कभी जमीन पर लेटकर तो कभी जेसीबी से खोदे गए पानी भरे गड्ढे में बैठकर विरोध करता रहा। मामले में प्रशासन और संबंधित कंपनी का पक्ष सामने आना बाकी है।