पश्चिम एशिया संकट के बीच RBI की मौद्रिक समीक्षा शुरू, रेपो रेट यथावत रहने के संकेत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Reserve Bank of India (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। यह बैठक 6 से 8 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें नीतिगत ब्याज दर और महंगाई से जुड़े अहम फैसले लिए जाएंगे।
बैठक की अध्यक्षता Sanjay Malhotra कर रहे हैं। समिति के निर्णयों की घोषणा 8 अप्रैल को की जाएगी।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रा पर दबाव को देखते हुए इस बार भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा जा सकता है।
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। इसका सीधा असर लोन, ईएमआई, बचत और निवेश पर पड़ता है, इसलिए इस फैसले पर बाजार और आम जनता की नजर रहती है।
गौरतलब है कि फरवरी 2026 की पिछली MPC बैठक में भी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था। हालांकि, फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच RBI कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है, जिसमें आखिरी कटौती दिसंबर 2025 में 0.25 प्रतिशत की गई थी।
MPC में कुल छह सदस्य होते हैं, जिनमें तीन RBI के अधिकारी और तीन बाहरी सदस्य शामिल होते हैं। यह समिति महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए नीतिगत दरों का निर्धारण करती है।
इस वित्त वर्ष में कुल छह मौद्रिक समीक्षा बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें अगली बैठक जून, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर और फरवरी 2027 में आयोजित की जाएगी।






