विधायक रमेश मेंदोला ने माताजी स्व. रामप्यारी देवी मेंदोला की स्मृति में गौमाता को छप्पन भोग अर्पित कर की महाआरती, कहा — गौसेवा ही सच्ची मातृभक्ति है

इंदौर, 29 अक्टूबर 2025।
आंवला नवमी के पावन अवसर पर इंदौर में श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के लोकप्रिय विधायक रमेश मेंदोला की पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती रामप्यारी देवी मेंदोला की पुण्य स्मृति में नंदानगर स्थित साईनाथ मंदिर गौशाला में भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।
यह आयोजन न केवल मातृस्मृति को समर्पित था बल्कि सनातन संस्कृति के मूल तत्वों — गौसेवा, श्रद्धा और सेवा भाव — का सजीव प्रतीक भी बना। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि कामधेनु गौमाता को छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया गया और तत्पश्चात 108 दीपों से महाआरती संपन्न हुई।
पूरा परिसर मंत्रोच्चारण, भजन और गौमाता की आराधना से गूंज उठा। श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और गौसेवकों ने इस आयोजन को एक दिव्य उत्सव का रूप दे दिया।
अनुष्ठान अग्रपीठाधीश्वर, मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। श्री महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “गौसेवा के बिना समाज की उन्नति संभव नहीं है। भारतीय संस्कृति में गौमाता को माता के समान स्थान दिया गया है, और जो व्यक्ति गौसेवा करता है वह समस्त प्राणियों की सेवा करता है।”

इस अवसर पर विधायक रमेश मेंदोला ने कहा —
“मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि जीवन के हर क्षण में दिशा देती है। मेरी माताजी की प्रेरणा से ही मैंने समाजसेवा का मार्ग चुना। आज उनके आशीर्वाद से गौसेवा का यह आयोजन हुआ है। गौसेवा, मातृभक्ति और पर्यावरण संरक्षण हमारे संस्कारों की आत्मा हैं, इन्हें जीवन में अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
विधायक मेंदोला ने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे अपने जीवन में गौमाता की सेवा, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि “हमारे संस्कारों की गहराई तब तक अक्षुण्ण रहेगी, जब तक हम अपनी परंपराओं का सम्मान करते रहेंगे।”
कार्यक्रम में शहर के कई संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, भाजपा पदाधिकारी, और क्षेत्रीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने गौमाता को अर्पित छप्पन भोग के पश्चात साधु-संतों को सादर भोजन प्रसाद भी कराया।
पूरे आयोजन के दौरान भक्ति संगीत, दीप सज्जा, और पुष्प वर्षा ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। गौशाला परिसर में “जय गौमाता” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे।
यह आयोजन मातृस्मृति, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का एक जीवंत उदाहरण बन गया।
इंदौर शहर में ऐसे आयोजन यह संदेश देते हैं कि जब संस्कृति, भक्ति और संवेदना एक साथ आती हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।






