जनजातीय युवाओं की खेल प्रतिभा राष्ट्र की अमूल्य पूंजी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

Droupadi Murmu ने देश के युवाओं, विशेषकर जनजातीय समुदाय के खिलाड़ियों की प्रतिभा को राष्ट्र की अमूल्य सामाजिक पूंजी बताते हुए उन्हें खेलों में सक्रिय भागीदारी और उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया है।

राष्ट्रपति ने एक लेख के माध्यम से अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में प्राकृतिक प्रतिभा प्रचुर मात्रा में मौजूद है, जिसे उचित प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

प्राकृतिक प्रतिभा और परंपरा

उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बच्चे सीमित संसाधनों के बावजूद प्रकृति के बीच खेल कौशल विकसित कर लेते हैं। मिट्टी, पेड़ों और प्राकृतिक वस्तुओं से खेल सामग्री बनाकर खेलना उनकी स्वाभाविक क्षमता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति ने तीरंदाजी जैसी पारंपरिक खेल विधाओं का उल्लेख करते हुए Eklavya को प्रेरणा स्रोत बताया।

प्रेरणादायक उदाहरण

उन्होंने Anjali Munda का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026’ में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने देशभर के युवाओं को प्रेरित किया है।

खेल से विकास और समरसता

राष्ट्रपति ने कहा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि यह आत्मविश्वास, टीम भावना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है। खेलों के माध्यम से युवाओं को आर्थिक अवसर और सामाजिक सम्मान भी प्राप्त होता है।

‘खेलो इंडिया’ की सराहना

उन्होंने Khelo India अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे खेल सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक हुआ है, जिससे अधिक युवाओं को अवसर मिल रहे हैं।

भविष्य की दिशा

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि जनजातीय युवाओं की प्रतिभा के सही उपयोग से भारत खेल जगत में नई ऊंचाइयों को छुएगा और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करेगा।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा—“खेलो इंडिया! खूब खेलो इंडिया!”

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