भारत ग्लोबल साउथ की भरोसेमंद आवाज़ बना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत आज Global South की भरोसेमंद और विश्वसनीय आवाज़ बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल वैश्विक बातचीत को दिशा दे रहा है, बल्कि एक संतुलित और समावेशी विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी सक्रिय योगदान दे रहा है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश मुंबई में आयोजित ‘Global Economic Cooperation 2026’ कार्यक्रम के लिए लिखे गए भाषण में सामने आया। यह आयोजन फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल द्वारा विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री का संबोधन भाजपा नेता विजय चौथाईवाला ने पढ़कर सुनाया।
वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब दुनिया कठिन समय में मजबूत नेतृत्व की तलाश कर रही है, तब भारत उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश वैश्विक चुनौतियों के लिए व्यावहारिक और ठोस समाधान प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत उच्च विकास दर और नियंत्रित महंगाई के बीच दुर्लभ संतुलन बनाए रखने में सफल रहा है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा परिदृश्य में उल्लेखनीय उपलब्धि है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना बना मॉडल
प्रधानमंत्री ने कल्याणकारी योजनाओं को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की चुनौती पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने Digital Public Infrastructure के माध्यम से इसे संभव बनाया है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के जरिए लाभार्थियों को पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से एक क्लिक पर योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इससे ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा को मजबूती मिली है।
टिकाऊ विकास और विनिर्माण में बढ़त
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी प्रगति टिकाऊ विकास के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने बताया कि देश की स्थापित ऊर्जा क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, जिससे भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाले अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
विनिर्माण क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माता बन चुका है। साथ ही, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ जैसे उभरते क्षेत्रों में भी देश तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो आत्मनिर्भरता और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में गहरे एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष में कहा कि जब दुनिया आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और भरोसे पर पुनर्विचार कर रही है, तब भारत वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने और साझा समृद्धि सुनिश्चित करने की विशेष स्थिति में है।






