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निःस्वार्थ सेवा ही सच्ची मानवता की पहचान : प्रधानमंत्री मोदी

Narendra Modi ने निःस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के मूल्यों पर जोर देते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिना किसी स्वार्थ के किया गया कार्य ही सच्ची मानवता की पहचान है, जो व्यक्ति को आत्मिक संतोष देने के साथ समाज के कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि निःस्वार्थ भाव से किए गए कर्म से भीतर खुशी मिलती है और इससे समाज भी बेहतर बनता है। इस दौरान उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित साझा किया—

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

इस सुभाषित का अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी प्राणियों के प्रति मन, वचन और कर्म से किसी प्रकार का द्वेष न रखना, सभी के प्रति दया और अनुग्रह का भाव रखना तथा दानशील होना सर्वोत्तम आचरण माना गया है।

प्रधानमंत्री के इस संदेश को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जुड़ा प्रेरणादायक संदेश बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और जीवन मूल्यों से जुड़े श्लोक एवं सुभाषित साझा करते रहे हैं। उनका मानना है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने में सक्षम है।

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