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प्रधानमंत्री आज ‘साधना सप्ताह 2026’ का करेंगे शुभारंभ, सिविल सेवकों की क्षमता विकास पर फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सिविल सेवकों की क्षमता विकास के लिए ‘साधना सप्ताह 2026’ का शुभारंभ करेंगे। इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना और सरकारी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) की विशेष बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रभावों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

यह इस मुद्दे पर सीसीएस की दूसरी विशेष बैठक थी। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने आम नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही खरीफ और रबी फसलों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के उपायों की समीक्षा की गई।

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि वैश्विक परिस्थितियों के प्रभाव से नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को प्रभावित क्षेत्रों और नागरिकों की समस्याओं को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने को कहा।

बैठक में कृषि, उर्वरक, जहाजरानी, विमानन, लॉजिस्टिक्स और एमएसएमई क्षेत्र में उभरती चुनौतियों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही आवश्यक आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखने के लिए एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में संभावित कमी और बिजली क्षेत्र से जुड़े उपायों की भी समीक्षा की गई।

कैबिनेट सचिव ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलएनजी और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और कालाबाजारी व जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

सरकार ने पाइपलाइन प्राकृतिक गैस कनेक्शन के विस्तार पर भी जोर दिया है। इसके अलावा, भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए 7-8 गीगावॉट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग व्यवस्था से छूट देने और थर्मल पावर स्टेशनों को अतिरिक्त कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

सरकार के इन प्रयासों का उद्देश्य देश में ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना और आम नागरिकों पर वैश्विक संकट का प्रभाव कम करना है।

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