G7 में पीएम मोदी का बड़ा संदेश: “AI की असली परीक्षा मानव सशक्तिकरण है”
फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर वैश्विक समुदाय को महत्वपूर्ण संदेश दिया। “सुरक्षित, तेज और प्रभावी AI के रोलआउट” विषय पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक की असली परीक्षा उसकी शक्ति नहीं, बल्कि यह है कि वह आम नागरिकों को कितना सशक्त बनाती है।
AI को मानव-केंद्रित बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक बन चुका है। इसकी परिवर्तनकारी क्षमता ने शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, प्रशासन और संचार सहित जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि AI का विकास और उपयोग पूरी तरह मानव-केंद्रित (Human-Centric) होना चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके और तकनीक केवल कुछ देशों या वर्गों तक सीमित न रह जाए।
साइबर स्पेस को बनाना होगा सुरक्षित
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि साइबर स्पेस वैश्विक सार्वजनिक हित को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। इसके लिए AI तकनीक तक समावेशी और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देशों को अपनी महत्वपूर्ण डिजिटल और सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना होगा, ताकि बढ़ते साइबर खतरों और डिजिटल अपराधों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
AI के लिए साझा वैश्विक मानकों की जरूरत
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने AI के सुरक्षित और जिम्मेदार विकास के लिए कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि AI सिस्टम को “Safe-by-Design” सिद्धांत के आधार पर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि सुरक्षा को तकनीक के मूल ढांचे में ही शामिल किया जा सके।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर साझा मानक, परीक्षण ढांचे और रेगुलेटरी सैंडबॉक्स विकसित करने का सुझाव भी दिया, जिससे नवाचार और नियमन के बीच संतुलन बनाया जा सके।
डीपफेक और साइबर धोखाधड़ी पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने डीपफेक, गलत सूचना (Misinformation) और साइबर धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को और मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं, इसलिए देशों को मिलकर ऐसे तंत्र विकसित करने होंगे जो तकनीक का दुरुपयोग रोक सकें।
AI बने विकास का माध्यम, विभाजन का नहीं
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI का लाभ दुनिया के सभी देशों तक पहुंचे। यदि तकनीक कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित रह जाती है तो इससे असमानता बढ़ सकती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि AI को समावेशी विकास का माध्यम बनाना होगा, ताकि यह वैश्विक प्रगति और मानव कल्याण को नई दिशा दे सके।
मानवता के लिए सकारात्मक बदलाव का साधन
अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि AI को जिम्मेदारी, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ विकसित किया जाए तो यह मानवता के लिए सबसे शक्तिशाली और सकारात्मक परिवर्तनकारी साधनों में से एक बन सकता है।
उन्होंने दुनिया के देशों से आह्वान किया कि वे AI के भविष्य को सुरक्षित, समावेशी और मानव हितों के अनुरूप बनाने के लिए मिलकर कार्य करें।
