प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: पृथ्वी का संरक्षण मानवता का पवित्र दायित्व

Narendra Modi ने पृथ्वी को ‘माता’ बताते हुए उसके संरक्षण को मानवता के लिए एक अहम और पवित्र दायित्व बताया है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा संकल्प भी है।
प्रधानमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने लिखा—
“यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा।
पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै॥”
इस सुभाषित का अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस पृथ्वी पर वृक्ष और वनस्पतियां स्थिर रूप से स्थापित हैं और जो पूरे विश्व का पोषण करती है, उस धेनु (गाय) के समान पृथ्वी का उपयोग तो करें, लेकिन उसका अहित न करें।
उन्होंने पृथ्वी को नमन करते हुए इसके संतुलित उपयोग और संरक्षण पर जोर दिया। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
यह संदेश लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी समझने और सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।






