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पीथमपुर में केमिकल वेस्ट प्लांट में भीषण आग, धमाकों से दहला औद्योगिक क्षेत्र; करोड़ों का नुकसान

Pithampur के औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार रात बड़ा हादसा हो गया, जब सेक्टर-3 स्थित केमिकल वेस्ट निस्तारण यूनिट में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास की अन्य फैक्ट्रियां भी इसकी चपेट में आ गईं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना रात करीब 9:45 बजे की बताई जा रही है। केमिकल से भरे ड्रमों में लगातार तेज धमाके होने लगे, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। फैक्ट्री में मौजूद करीब 10 मजदूरों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

दमकल की 15 गाड़ियां, रोबोट और फोम से काबू

सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं। Indore और Dhar से करीब 15 दमकल वाहन बुलाए गए।

आग बुझाने के लिए फोम एक्सटिंग्विशर, पानी के टैंकर और रेत-बजरी का उपयोग किया गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए विशेष रोबोट की मदद भी ली गई। प्रशासन के अनुसार 200 से अधिक पानी के टैंकर इस्तेमाल किए जा चुके हैं।

प्रभारी कलेक्टर Abhishek Choudhary और एसपी Mayank Awasthi ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य की निगरानी की। देर रात तक आग पर करीब 90% नियंत्रण पा लिया गया, जबकि पूरी तरह बुझाने की कार्रवाई जारी रही।

कई यूनिट जलीं, करोड़ों का नुकसान

आग की चपेट में आकर फैक्ट्री परिसर में खड़ी जेसीबी और हाइड्रा क्रेन जलकर खाक हो गईं। आग पास की अन्य कंपनियों तक भी फैल गई, जिनमें Sleeploop India Private Limited और Gallard Steel Limited शामिल हैं।

इन कंपनियों की प्लांट और मशीनरी पूरी तरह जल गई, जिससे उत्पादन ठप हो गया है और करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

कई किलोमीटर तक दिखा धुआं

आग इतनी भीषण थी कि काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई देता रहा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास की फैक्ट्रियों को खाली कराया और क्षेत्र में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया।

जांच के आदेश

प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि केमिकल वेस्ट में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग लगी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

जनहानि नहीं, हालात नियंत्रण में

अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंदरूनी हिस्सों में धधकती आग को पूरी तरह बुझाने के प्रयास जारी हैं।

यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और खतरनाक कचरे के प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है।

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