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क्या बढ़ने वाले हैं Petrol-Diesel के दाम? RBI गवर्नर के बयान से बढ़ी चिंता, जानें आज का रेट

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price Today) को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयान ने संकेत दिए हैं कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबा खिंचता है, तो सरकार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में Petrol Price Hike की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 13 मई को एक कार्यक्रम में RBI Governor Statement देते हुए संजय मल्होत्रा ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो सरकार के लिए बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह वहन करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी आगे बढ़ाई जा सकती है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अनिश्चितता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट की आशंकाओं ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Price लगातार उछाल पर है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं।

हालांकि इन तमाम अटकलों के बीच 14 मई को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।

आज पेट्रोल-डीजल का रेट (14 मई):

शहरपेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)
दिल्ली94.7787.67
मुंबई103.5490.03
कोलकाता105.4592.02
चेन्नई100.8092.39
बेंगलुरु102.9290.99
देहरादून93.1788.01
फतेहाबाद97.0989.56
गोवा (पणजी)95.5188.07
लेह105.9991.46

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सरकारी तेल कंपनियों पर साफ दिखाई देने लगा है। सूत्रों के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी शीर्ष तेल कंपनियां हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेल रही हैं। नियंत्रित खुदरा कीमतों और बढ़ती आयात लागत के बीच बढ़ता अंतर इनके लिए बड़ा आर्थिक दबाव बन गया है।

सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपनियों को राहत देने की कोशिश की थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक संकट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो आने वाले समय में ईंधन कीमतें बढ़ सकती हैं। फिलहाल आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार बढ़ती लागत को खुद वहन करती है या इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।

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