पेंटागन में मीडिया कार्यालय बंद करने का फैसला, प्रेस की पहुंच पर नई पाबंदियां

अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक बड़े फैसले के तहत पेंटागन में स्थित मीडिया कार्यालयों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम प्रेस की पहुंच और पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस के बीच उठाया गया है।

पेंटागन प्रेस ऑपरेशंस (PPO) के तहत आने वाले इन कार्यालयों को हटाते हुए रक्षा विभाग ने पत्रकारों के लिए नई क्रेडेंशियल (मान्यता) नीति लागू करने की घोषणा भी की है। इस फैसले के तहत पेंटागन भवन के अंदर दशकों से सक्रिय मीडिया की मौजूदगी समाप्त हो जाएगी।

रक्षा विभाग के प्रवक्ता शॉन पार्नेल के अनुसार, पेंटागन के अंदर स्थित “कॉरेस्पोंडेंट्स कॉरिडोर”—जहां से पत्रकार लंबे समय से सेना से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते आए हैं—उसे तुरंत बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में पत्रकारों के लिए पेंटागन के बाहर एक एनेक्स (अतिरिक्त भवन) बनाया जाएगा, जहां से वे काम कर सकेंगे, हालांकि इसके निर्माण की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है।

इस फैसले के पीछे एक फेडरल कोर्ट के हालिया आदेश को भी अहम कारण माना जा रहा है। इस आदेश में अदालत ने द न्यूयॉर्क टाइम्स के पक्ष में फैसला देते हुए रिपोर्टरों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी थी।

इस निर्णय पर मीडिया संस्थानों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रवक्ता चार्ली स्टैडलैंडर ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह अदालत के आदेश का उल्लंघन है और इस पर दोबारा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पेंटागन प्रेस एसोसिएशन ने भी इस नीति को अदालत के फैसले की भावना के खिलाफ बताया है।

नई नीति के अनुसार, पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यू के लिए पेंटागन में प्रवेश की अनुमति तो होगी, लेकिन अब उन्हें सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ जाना पड़ सकता है। इससे स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इस मुद्दे को लेकर प्रेस की आजादी पर भी सवाल उठने लगे हैं। मीडिया संगठनों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील समय में, जब ईरान के साथ तनाव और अन्य अंतरराष्ट्रीय घटनाएं चल रही हैं, सूचना की स्वतंत्र पहुंच बेहद जरूरी है।

यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान मीडिया एक्सेस को लेकर जारी विवादों की एक और कड़ी माना जा रहा है। आरोप है कि प्रशासन पारंपरिक मीडिया पर प्रतिबंध लगाते हुए कुछ खास विचारधारा वाले मीडिया संस्थानों को बढ़ावा दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में अमेरिका में प्रेस की स्वतंत्रता और सरकारी पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

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