काबुल समेत कई इलाकों पर पाकिस्तान की बमबारी, अफगानिस्तान का पलटवार; चौकियों पर कब्जे का दावा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद अब बड़े सैन्य संघर्ष का रूप लेता नजर आ रहा है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान द्वारा अफगान तालिबान के खिलाफ हवाई हमले किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। सीमा पर भारी गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने शुक्रवार तड़के काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ इलाकों में तालिबान के कथित रक्षा ठिकानों को निशाना बनाकर बमबारी की। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कहते हुए संकेत दिया कि अब पाकिस्तान ने सख्त रुख अपना लिया है। पाकिस्तान की ओर से इसे आतंकवाद के खिलाफ अभियान बताया जा रहा है।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के हमलों को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए जवाबी सैन्य अभियान चलाने का दावा किया है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ हिस्सों में हवाई हमले हुए, हालांकि उन्होंने बड़े नुकसान से इनकार किया है। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी पाकिस्तान की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, डूरंड रेखा के पास जवाबी अभियान चलाया गया, जिसमें पाकिस्तान की कई सैन्य चौकियों को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने दावा किया कि इस कार्रवाई में करीब 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 19 चेक पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया। साथ ही कई हथियार जब्त किए जाने और कुछ सैनिकों को जिंदा पकड़ने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस अभियान में अफगान बलों को भी नुकसान हुआ, जिसमें कई सैनिकों की मौत और कुछ के घायल होने की खबर है। वहीं तोरखम इलाके में शरणार्थियों के अस्थायी शिविर पर हुए हमले में महिलाओं और बच्चों के घायल होने की बात भी सामने आई है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में एयर स्ट्राइक किए थे, जिन्हें पाकिस्तान ने आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई बताया था। वहीं अफगानिस्तान की ओर से दावा किया गया कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक मारे गए। इसी घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता चला गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता और दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से जारी दावों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।






