Balen Shah संसद में बिना भाषण दिए पहला अधिवेशन समाप्त, परंपरा टूटी

Nepal में आम चुनाव के बाद संसद का पहला अधिवेशन एक असामान्य स्थिति में समाप्त हो गया, जब प्रधानमंत्री Balen Shah ने पूरे सत्र के दौरान कोई भाषण नहीं दिया।
आमतौर पर चुनाव के बाद प्रधानमंत्री संसद को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण की जानकारी देते हैं। हालांकि यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह एक स्थापित संसदीय परंपरा रही है। ऐसे में बालेन्द्र शाह का मौन रहना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि Balen Shah के नेतृत्व में जेनजी आंदोलन के प्रभाव से हुए चुनावों में उनकी सरकार को लगभग दो-तिहाई बहुमत मिला है। इस वजह से संसद और जनता के बीच उनकी प्राथमिकताओं को लेकर खास उत्सुकता थी।
27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बालेन्द्र शाह ने 100 दिनों की कार्ययोजना जारी की थी, जिसमें प्रशासनिक सुधार, नए कानून बनाने और पुराने कानूनों में संशोधन जैसे कई अहम बिंदु शामिल हैं। हालांकि इस कार्यसूची को न तो संसद में पेश किया गया और न ही औपचारिक रूप से सदन के संज्ञान में लाया गया।
इसके कारण सांसदों को भी सरकार की योजनाओं की जानकारी मीडिया रिपोर्टों के जरिए ही मिली। इस स्थिति को संसदीय व्यवस्था के जानकारों ने असामान्य बताया है।
संघीय संसद सचिवालय के पूर्व महासचिव Manohar Prasad Bhattarai ने कहा कि आमतौर पर संसद के पहले अधिवेशन में प्रधानमंत्री का संबोधन परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने पूरे सत्र के दौरान प्रधानमंत्री के मौन रहने पर आश्चर्य व्यक्त किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार को अपनी नीतियों और योजनाओं को स्पष्ट रूप से संसद के सामने रखना होगा, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रह सके।






