नेपाल में ओली समेत शीर्ष नेताओं पर कार्रवाई की सिफारिश, मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से हड़कंप

नेपाल में पिछले वर्ष हुए जेन-जी आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की जांच रिपोर्ट ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक, प्रधान सेनापति अशोकराज सिग्देल सहित कई शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
यह रिपोर्ट आयोग की सदस्य डॉ. लिली थापा के नेतृत्व में गठित समिति ने तैयार की है, जिसने आंदोलन के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघनों की विस्तृत जांच की। समिति ने अपनी रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष तपबहादुर मगर को सौंप दी है, जिस पर अब आयोग की पूर्ण बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने में विफल रही। परिषद पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होने के बावजूद वह हालात का सही आकलन करने और उचित सुरक्षा योजना लागू करने में असफल रही।
जांच में यह भी सामने आया कि आंदोलन को नियंत्रित करने के दौरान चरणबद्ध बल प्रयोग के बजाय एक साथ अत्यधिक बल और घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।
आयोग ने जांच के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के बयान दर्ज किए, जिनमें संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पुलिस महानिरीक्षक चन्द्रकुवेर खापुङ, सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजु अर्याल शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने, काठमांडू के तत्कालीन मेयर बालेन्द्र शाह और अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 8 सितंबर 2025 को पुलिस कार्रवाई में मारे गए अधिकांश लोगों को कमर के ऊपर गोली लगी थी, जो बल प्रयोग के गंभीर स्वरूप को दर्शाता है।
समिति ने जांच के लिए 300 से अधिक संदेश, वीडियो और ऑडियो सामग्री का अध्ययन किया और फोरेंसिक विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष तैयार किए। यह रिपोर्ट 600 पृष्ठों से अधिक की है, जबकि परिशिष्ट सहित कुल दस्तावेज करीब 10,000 पृष्ठों का है।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मानव अधिकार आयोग अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट पारित होने के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस रिपोर्ट को नेपाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में सरकार और प्रशासन पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।






