नेपाल में 10 साल पुराने निष्क्रिय बैंक खाते होंगे सील, 17 अरब रुपये जाएंगे सरकारी खजाने में

Nepal सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निष्क्रिय पड़े बैंक खातों को सील कर उनमें जमा राशि को सरकारी कोष में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे करीब साढ़े 17 अरब रुपये सरकार के खजाने में जाने की संभावना है और इस फैसले के बाद आम नागरिकों के बीच चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर Bishwanath Paudel के अनुसार मार्च 2026 के अंत तक ऐसे निष्क्रिय खातों में कुल लगभग 1763 करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं, जबकि इन खातों की संख्या 36 लाख 45 हजार से अधिक है, सरकार अब इन सभी खातों को सील कर उनमें जमा रकम को अपने खाते में लाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
यह कदम बैंक तथा वित्तीय संस्थान संबंधी कानून के तहत उठाया गया है, जिसके अनुसार बैंकों को हर वर्ष निष्क्रिय खातों की जानकारी Nepal Rastra Bank को देना अनिवार्य होता है, इसी आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक का यह पूरा डेटा सामने आया है और उसी के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है।
नई सरकार की पहली मंत्रिपरिषद् बैठक में पारित “शासकीय सुधार के 100 कार्यसूची” के तहत इस फैसले को मंजूरी दी गई थी, जिसमें 10 साल से अधिक समय से निष्क्रिय खातों की राशि को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सरकारी कोष में लाने का प्रावधान शामिल है, जिसे अब लागू किया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार इन खातों में औसतन करीब 5 हजार रुपये जमा हैं, जो आम नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण राशि मानी जाती है, ऐसे में इस फैसले के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी जमा पूंजी जब्त हो जाएगी या भविष्य में उसे वापस पाने का कोई प्रावधान रहेगा, हालांकि सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के तहत ही की जा रही है।
कुल मिलाकर, यह फैसला नेपाल की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही आम जनता की चिंताओं को दूर करना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।






