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हाथ नहीं चलते, पैरों से लिखकर परीक्षा दे रहे नेपाल के सन्देश बुढामगर, बने प्रेरणा की मिसाल

नेपाल के रोल्पा जिले के एक छोटे से गांव से आई 12 वर्षीय छात्र सन्देश बुढामगर की कहानी आज हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है। जन्म से ही उनके दोनों हाथ काम नहीं करते, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय पैरों से लिखकर परीक्षा देना सीख लिया।

डेढ़ घंटे पैदल चलकर पहुंचते हैं परीक्षा केंद्र
सन्देश रोज़ करीब डेढ़ घंटे पैदल चलकर परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं और जमीन पर बैठकर पैरों की उंगलियों से कलम पकड़कर उत्तर लिखते हैं। उनकी मेहनत और लगन देखने वालों को आश्चर्यचकित कर देती है।

कक्षा-5 के छात्र, कठिन परिस्थितियों में संघर्ष
नेपाल राष्ट्रीय आधारभूत विद्यालय के कक्षा-5 के छात्र सन्देश इन दिनों पालिका-स्तरीय वार्षिक परीक्षा दे रहे हैं। परीक्षा केंद्र उनके गांव से दूर स्थित है, लेकिन कठिन रास्तों के बावजूद उनका हौसला कम नहीं होता।

कमजोरी को बनाया ताकत
सन्देश ने नर्सरी कक्षा से ही पैरों से लिखने का अभ्यास शुरू कर दिया था। आज वे कहते हैं,
“अब जितना भी लिखना पड़े, मैं आसानी से पैरों से लिख सकता हूं।”

शिक्षकों ने भी सराहा
उनके शिक्षक बताते हैं कि सन्देश साफ और समझने योग्य तरीके से सभी उत्तर लिखते हैं, जो उनकी मेहनत और अभ्यास का परिणाम है।

सुविधाओं की कमी, लेकिन हौसला मजबूत
दुर्गम क्षेत्र में रहने के कारण उनके परिवार को आज तक सही इलाज या जांच की सुविधा नहीं मिल पाई है। इसके बावजूद सन्देश ने कभी खुद को कमजोर नहीं माना।

प्रेरणा बन गए सन्देश
सन्देश बुढामगर आज केवल अपने गांव ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है

उनका संघर्ष और आत्मविश्वास हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किलों के सामने हार मानने की सोचता है।

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