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राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम लागू, राष्ट्रीय खेल बोर्ड के गठन की संभावना मजबूत

भारत में राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों के लागू होने के साथ ही राष्ट्रीय खेल प्रशासन में बड़े बदलाव की नींव रख दी गई है। इस अधिनियम के प्रभावी होने से राष्ट्रीय खेल बोर्ड और खेल न्यायाधिकरण की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। सरकार इस कदम के जरिए देश के खेल प्रशासन के व्यापक पुनर्गठन की दिशा में आगे बढ़ेगी।

इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ओलंपिक और पैरालंपिक समितियों के साथ-साथ राष्ट्रीय खेल महासंघों सहित सभी राष्ट्रीय खेल निकायों के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को सुनिश्चित करना है। लंबे समय से खेल संगठनों में सुधार की मांग उठ रही थी, जिसे अब कानूनी आधार मिल गया है।

अधिसूचित प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय खेल निकायों की कार्यकारी समितियों में अधिकतम 15 सदस्य हो सकेंगे। इसके साथ ही यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में कम से कम दो योग्य खिलाड़ी शामिल हों, ताकि खिलाड़ियों की आवाज सीधे निर्णय प्रक्रिया में शामिल हो सके।

इस अधिनियम के तहत प्रस्तावित तीन सदस्यीय राष्ट्रीय खेल बोर्ड को वित्तीय निगरानी के अहम अधिकार दिए जाएंगे। यह बोर्ड राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज पर नजर रखेगा और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उन्हें दंडित करने का अधिकार भी रखेगा।

सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के लागू होने से भारतीय खेल व्यवस्था में संस्थागत सुधार होंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के प्रदर्शन को मजबूती मिलेगी। यह कदम खेलों में निष्पक्षता, पेशेवर प्रबंधन और खिलाड़ियों के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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