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मध्यप्रदेश में पहली बार आंगनवाड़ी केन्द्रों पर ‘विद्यारंभ समारोह’, बच्चों को मिला प्रमाण-पत्र

मध्यप्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की गई है। प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में पहली बार ‘विद्यारंभ समारोह’ का आयोजन किया गया, जिसमें 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को “विद्यारंभ प्रमाण-पत्र” प्रदान किए गए।

जनसम्पर्क अधिकारी बिन्दु सुनील के अनुसार, इस पहल के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजित किया गया, जिससे शाला पूर्व शिक्षा को सामाजिक और संस्थागत मान्यता मिल सके।

राज्य स्तर पर इस पहल को विशेष रूप से प्रदर्शित करने के लिए भोपाल में ‘ग्रेजुएशन सेरेमनी’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगी। यह आयोजन बाणगंगा परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 1061 और 859 में किया गया, जहां 35 बच्चों को प्रमाण-पत्र दिए गए।

यह पहल केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों के अनौपचारिक शिक्षा से औपचारिक विद्यालयी शिक्षा में सहज संक्रमण को सुनिश्चित करना है। साथ ही परिवार और समुदाय को भी शाला पूर्व शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षा क्षेत्र की संस्था रॉकेट लर्निंग का भी सहयोग मिल रहा है। संस्था के साथ हुए समझौते के तहत वर्तमान में मध्यप्रदेश के 39 जिलों में गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न केवल बच्चों की शैक्षणिक यात्रा को मजबूत बनाएगी, बल्कि आंगनवाड़ी केन्द्रों के प्रति समुदाय का विश्वास और सहभागिता भी बढ़ाएगी। इससे बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत होगा और भविष्य में ड्रॉपआउट दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

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