सरकारी उत्खनन में उजागर हुआ लक्कुंडी का ऐतिहासिक अतीत, ग्रामीणों में संभावित विस्थापन को लेकर चिंता

कर्नाटक के गदग तालुक स्थित लक्कुंडी गांव में सरकारी उत्खनन कार्य में तेजी दिखाई दे रही है। खुदाई के दौरान लगातार प्राचीन पुरातात्विक अवशेष सामने आने से गांव में उत्सुकता के साथ-साथ ग्रामीणों में संभावित विस्थापन को लेकर चिंता भी गहराती जा रही है।
उत्खनन और ग्रामीण चिंताएं
नागनाथ मंदिर के आसपास रहने वाले 18 से अधिक परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट कहा, “यदि हमारी जमीन के बदले उचित मुआवजा और समकक्ष भूमि दी जाती है, तभी हम स्थानांतरण के लिए तैयार होंगे। बराबर जमीन दिए बिना हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे।”
प्राचीन खोजें और महत्व
लक्कुंडी किले के वीरभद्रेश्वर मंदिर के समीप उत्खनन कार्य अब छठे दिन में है। प्रतिदिन लगभग 35 मजदूर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक सावधानीपूर्वक खुदाई में लगे हुए हैं।
उत्खनन में अब तक कई प्राचीन संरचनात्मक अवशेष, पत्थर की कलाकृतियां और स्थापत्य अवयव प्राप्त हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण खोज एक प्राचीन पानिपीठिका (पीठ) रही, जिस पर उकेरे गए गरुड़ चिह्न के आधार पर यह माना जा रहा है कि यह विष्णु या केशव देव से संबंधित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अवशेष 12वीं–13वीं शताब्दी का है और कल्याण चालुक्य शासनकाल के प्रसिद्ध केशवादित्य मंदिर से जुड़ा हो सकता है।
सांस्कृतिक और प्रशासनिक महत्व
यदि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि होती है, तो यह खोज लक्कुंडी के धार्मिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में अहम साबित होगी। साथ ही, ग्रामीणों के अधिकारों, उचित मुआवजे और संवेदनशील पुनर्वास नीति को लेकर सरकार से स्पष्ट कदम उठाने की मांग भी तेज हो रही है।
जैसे-जैसे उत्खनन कार्य आगे बढ़ रहा है, लक्कुंडी की ऐतिहासिक विरासत की नई परतें उजागर होने की उम्मीद बढ़ती जा रही है, और पुरातत्व विशेषज्ञ इस खोज को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मान रहे हैं






