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जबलपुर में 55 लाख रुपये के उपार्जन घोटाले का खुलासा, 17 लोगों पर एफआईआर दर्ज

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में वर्ष 2023-24 के उपार्जन कार्य के दौरान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों की आड़ में शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का मामला सामने आया है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देश पर कृषि विभाग ने दो अलग-अलग मामलों में कुल 17 व्यक्तियों के विरुद्ध पाटन और विजय नगर थानों में एफआईआर दर्ज कराई है।

कृषि उप संचालक उमेश कुमार कटहरे ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि दोनों कंपनियों के संचालकों और कर्मचारियों ने प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग चार्ज और कमीशन के नाम पर शासन को 55 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक हानि पहुंचाई है।

पहले मामले में विजय नगर थाने में बिल्किसगंज फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के 6 डायरेक्टर और 3 कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि कंपनी से जुड़े लोगों ने अवैध रूप से 15 लाख 72 हजार 802 रुपये की राशि अर्जित कर शासन को नुकसान पहुंचाया। इस मामले में बनप सिंह वर्मा, संदीप दुबे, सचिन दुबे, अंशुल बर्मन, सुधीर दुबे, विनोद पटेल, संजय हल्दकार और साहिल पटेल को आरोपी बनाया गया है।

दूसरे मामले में पाटन थाने में बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड के 6 डायरेक्टर और 3 कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में आरोपियों द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर तथा फर्जी नियुक्तियों के माध्यम से 39 लाख 67 हजार 781 रुपये की आर्थिक अनियमितता किए जाने का खुलासा हुआ। इस प्रकरण में सचिन दुबे, रंजना पांडे, संदीप दुबे, अंशुल वर्मन, नेहा पांडे, उमा सिंह, मनीष चौरसिया, कमलेश साहू और नीलेश विश्वकर्मा को नामजद किया गया है।

कृषि विभाग के अनुसार दोनों कंपनियों के संचालकों और कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी बैंक खाते, कूटरचित दस्तावेज और किसानों की काल्पनिक सूचियां तैयार कीं। इनके माध्यम से उपार्जन कार्य से संबंधित भुगतान अपने खातों में ट्रांसफर कराकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

बताया गया कि इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत किसान मजदूर महासंघ जबलपुर के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह से की थी। शिकायत के बाद कलेक्टर ने जांच समिति गठित कर मामले की जांच कराई। जांच में कंपनियों द्वारा प्रस्तुत बैंक खातों और किसानों की सूची को फर्जी पाया गया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर कृषि विभाग की ओर से सहायक संचालक कृषि रवि आम्रवंशी ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच कर रही है और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

इस कार्रवाई को उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी धन के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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