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आई-पैक के 20 दिन काम रोकने से हलचल, तृणमूल कांग्रेस की वैकल्पिक टीम ने संभाला मोर्चा

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आई-पैक (I-PAC) के 20 दिनों तक काम रोकने के फैसले ने राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक, संस्था ने प्रचार कार्य में लगे कर्मचारियों को ई-मेल भेजकर अस्थायी रूप से अवकाश पर जाने को कहा है।

शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस ने इस खबर को फर्जी बताया, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इसकी पुष्टि की कि आई-पैक ने अस्थायी रूप से काम रोक दिया है। इसके तुरंत बाद पार्टी ने स्थिति संभालने के लिए अपनी वैकल्पिक टीम को मैदान में उतार दिया।

सूत्रों के अनुसार, पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आई-पैक के इस फैसले से पार्टी नेताओं में चिंता बढ़ गई थी। राज्य की 152 सीटों पर मतदान प्रस्तावित है, ऐसे में चुनावी रणनीति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि पार्टी की अपनी प्रशिक्षित पेशेवर टीम पहले से ही सक्रिय है। अब यही टीम प्रचार अभियान, बूथ प्रबंधन और मतदान दिवस की निगरानी का कार्य संभालेगी। बताया जा रहा है कि यह टीम अभिषेक बनर्जी के कार्यालय से संचालित होती है और कई जिलों में पहले से काम कर रही थी।

बूथ स्तर पर निगरानी मजबूत करने के लिए व्हाट्सएप समूह बनाए जा रहे हैं, जहां मतदान प्रतिशत, ईवीएम सीलिंग का समय और स्थानीय हालात की जानकारी तुरंत साझा की जाएगी।

दूसरी ओर, आई-पैक कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल भी देखा जा रहा है। कई जिलों में उनके लिए वाहन सुविधाएं बंद होने की खबरें सामने आई हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह किसी को बेरोजगार नहीं होने देंगी। उन्होंने सार्वजनिक सभा में कहा कि “जो लोग हमारे लिए काम करते हैं, उन्हें डराया जा रहा है। यदि उन्हें हटाया गया तो हम उन्हें काम देंगे।”

गौरतलब है कि हाल के महीनों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद आई-पैक के कई पदाधिकारियों पर दबाव बढ़ा है। संस्था ने अपने ई-मेल में कानूनी कारणों का हवाला देते हुए अस्थायी रूप से काम रोकने की बात कही है।

तृणमूल कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रचार तय योजना के अनुसार जारी है और किसी प्रकार की बाधा नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आई-पैक के इस अस्थायी हटने से चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

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