इंदौर पार्षद जीतू यादव की BJP में वापसी: MIC मेंबर बनाए जाने की चर्चा; पुलिस जांच में भी मिली क्लीन चिट

इंदौर। बीजेपी से निष्कासित पार्षद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हो गई है। पुलिस जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद बीजेपी ने उनका निष्कासन खत्म कर दिया है।
बीजेपी के प्रदेश कार्यालय से 18 अगस्त 2026 को जारी पत्र में जिला अध्यक्ष सुमित मिश्रा को इसकी जानकारी दी गई है। बीजेपी प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन की ओर से पत्र भी जारी किया गया है।
इसमें लिखा है- जिला इंदौर नगर के निष्कासित पार्षद जीतू यादव को पुलिस जांच में क्लीन चिट दिए जाने और जिला अध्यक्ष की अनुशंसा के बाद प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार प्राथमिक सदस्यता से किया गया निष्कासन 18 अगस्त 2026 को समाप्त कर दिया गया है।
अब तक खाली रहा जीतू का एमआईसी पद
जीतू यादव के निष्कासन के बाद उनकी जगह किसी दूसरे पार्षद या नेता को एमआईसी का प्रभार नहीं दिया गया। पिछले करीब 18 महीने से उनका विभाग महापौर के पास ही रहा। अब जीतू यादव का निष्कासन खत्म होने के बाद उन्हें दोबारा एमआईसी में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

राजनीतिक सक्रियता बढ़ने के संकेत
पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी भेजी गई है।
जीतू यादव की पार्टी में वापसी को इंदौर की स्थानीय राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। निष्कासन खत्म होने के बाद अब उनकी राजनीतिक सक्रियता फिर बढ़ने की संभावना है। विधानसभा-2 की राजनीति में भी उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है।
चुनाव से पहले वापसी को अहम माना जा रहा
अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव को देखते हुए जीतू यादव की वापसी को राजनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है। कुलकर्णी नगर वाले वार्ड में लंबे समय से कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे हैं। बताया जाता है कि पिछले करीब 9 साल से जीतू यादव और उनके परिवार के सदस्य इस क्षेत्र से पार्षद रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव को देखते हुए उनकी वापसी को संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच में भूमिका साबित नहीं होने के बाद मिली राहत
पुलिस जांच में घटना के समय जीतू यादव की मौके पर मौजूदगी नहीं मिली। उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड समेत अन्य तथ्यों की जांच के बाद मामले में उनकी संलिप्तता साबित नहीं हुई। पुलिस की जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद अब बीजेपी ने भी उनके खिलाफ की गई संगठनात्मक कार्रवाई समाप्त कर दी है।

कालरा हमला मामले के बाद हुई थी कार्रवाई
कमलेश कालरा के घर 4 जनवरी 2025 को हुए हमले के मामले में जीतू यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। जांच के दौरान उन्हें संदिग्ध माना गया था। इसके बाद पार्टी स्तर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। साथ ही एमआईसी के पद से भी उन्हें हटना पड़ा था।
वायरल कॉल रिकॉर्डिंग के बाद बढ़ा था विवाद
मामले की शुरुआत नगर निगम कर्मचारी और पार्षद कमलेश कालरा के बीच हुई बातचीत की एक कॉल रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद हुई थी। इस रिकॉर्डिंग में कालरा की ओर से जीतू यादव को लेकर टिप्पणी किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद कालरा के घर पर हमला हुआ और घटना के वीडियो भी वायरल हुए। हमले के दौरान कालरा के नाबालिग बेटे के साथ बदसलूकी के आरोप लगे थे।