इंदौर के गांव बने ‘KGF’: 6 मीटर की मंजूरी, 50 मीटर तक खोदा; ब्लास्टिंग से घरों की दीवारों में दरारें, ग्रामीण बोले- रात के सन्नाटे में जमीन कांपती है, खेतों पर जमी धूल की परतें

अनिल धारवा। बेटमा। धूल के गुबार, दिन-रात गूंजते स्टोन क्रेशर, पत्थरों से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही और भारी मशीनों से होती खुदाई। इंदौर जिले के बेटमा टप्पे के सेजवानी, रंगवासा और रावत गांवों का मौजूदा हाल किसी फिल्मी खनन के सेट जैसा नजर आता है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चल रहे खनन और स्टोन क्रेशर संचालन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर खनन किया जा रहा है।
क्षेत्र में 10 से अधिक स्टोन क्रेशर, चारों ओर धूल और खनन
देपालपुर अनुभाग के सेजवानी, रंगवासा और रावत गांवों में 10 से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और कई स्थानों पर स्वीकृत लीज क्षेत्र और निर्धारित सीमाओं से आगे तक खुदाई की जा रही है। किसानों का आरोप है कि खनन अब उनकी निजी कृषि भूमि की सीमाओं तक पहुंचने लगा है।

किसान बोले- सीमांकन नहीं हुआ, खेत तक पहुंच रहा खनन
निर्माला बाई, पति केदार खाती ने प्रशासन से अपनी कृषि भूमि का सीमांकन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी जमीन सर्वे नंबर 268/1, 268/2 और 267/1 पर वर्षों से खेती हो रही है। अब तक सीमांकन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि हाल ही में उनकी जमीन से लगे सरकारी सर्वे नंबर का सीमांकन खदान के लिए किया गया। जिससे उनकी फसल को नुकसान पहुंचा। उन्हें आशंका है कि भविष्य में उनकी निजी जमीन पर भी अवैध उत्खनन हो सकता है।

6 मीटर की अनुमति, लेकिन 20 से 50 मीटर तक खुदाई के आरोप
स्थानीय लोगों का दावा है कि नियमानुसार पत्थर खनन के लिए करीब 6 मीटर गहराई तक खुदाई की अनुमति होती है, लेकिन कई खदानों में 20 मीटर से अधिक और कुछ स्थानों पर करीब 50 मीटर तक खुदाई किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन के बाद इन गहरे गड्ढों को सुरक्षित नहीं किया गया, जिससे बारिश के दौरान इनमें पानी भर गया और ये कृत्रिम तालाब जैसे बन गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से ये गड्ढे ग्रामीणों और मवेशियों के लिए खतरा बने हुए हैं।

स्टोन क्रेशरों की धूल से प्रभावित हो रही खेती
रंगवासा और आसपास के किसानों का कहना है कि स्टोन क्रेशरों से निकलने वाली धूल खेतों तक पहुंच रही है। फसलों और मिट्टी पर धूल की परत जमने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। किसानों के मुताबिक अब वे साल में एक फसल भी पूरी क्षमता से नहीं ले पा रहे हैं। लगातार उड़ती धूल के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।

रात में ब्लास्टिंग से कांपते हैं मकान
ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों में रात के समय भी ब्लास्टिंग की जाती है। धमाकों के कारण आसपास के मकानों में कंपन महसूस होता है। कुछ घरों में दरारें आने का भी दावा किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं। अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रदूषण अनुमति और रॉयल्टी पर भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्टोन क्रेशर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शर्तों का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं। वहीं खनिज परिवहन और रॉयल्टी को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय डंपरों से खनिज का परिवहन होता है। संबंधित विभागों की निगरानी नजर नहीं आती।

बार-बार लीज नवीनीकरण पर भी सवाल
खनिज विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में कई खदानों की 10 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद उनका नवीनीकरण किया गया है। कुछ मामलों में तीसरी बार तक लीज रिन्यू होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पुराने खनन से हुए पर्यावरणीय नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किए बिना नवीनीकरण कैसे किया गया।

सुरक्षा नियम कागजों तक सीमित होने के आरोप
जानकारों के अनुसार खदानों में सुरक्षा और पुनर्स्थापन के लिए खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) और खनिज विभाग के स्पष्ट नियम हैं। खनन पूरा होने के बाद गड्ढों को सुरक्षित करना और पुनर्वास के उपाय करना अनिवार्य होता है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बड़े-बड़े गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
सिस्टम से उठ रहे ये बड़े सवाल
- यदि लीज में सीमित गहराई की अनुमति है तो अधिक गहराई तक खुदाई कैसे हुई?
- खदानों का नवीनीकरण सुरक्षा मानकों की जांच के बाद हुआ या नहीं?
- रात में होने वाले खनिज परिवहन की निगरानी क्यों नहीं हो रही?
- ब्लास्टिंग से प्रभावित ग्रामीणों को नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
रिपोर्ट मिलने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिली है। खनिज विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट की जाएगी। –चरण सिंह हुड्डा, देपालपुर एसडीएम